टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में खराब सड़कें ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं।
टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र में भी पिपलेथ समेत पांच गांवों को जोड़ने वाला मोटर मार्ग लंबे समय से बदहाल स्थिति में है।
सड़क पर जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं और कई हिस्सों में भूस्खलन के कारण रास्ता खतरनाक हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क का निर्माण कार्य करीब पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है।
कई जगह सड़क का हिस्सा टूट चुका है।
ऐसे में लोगों को जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
5 गांवों के लिए यही मुख्य सड़क
पिपलेथ, कठिया, उत्तखंड़ा, कुमाली और चौंपा गांवों को जोड़ने वाला यह मोटर मार्ग स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में आने-जाने के लिए यही प्रमुख सड़क मार्ग है।
बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है।
सड़क किनारे पर्याप्त सुरक्षा दीवार और पक्के पुश्ते नहीं होने के कारण कई संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
बारिश में बार-बार हो रही लैंडस्लाइडिंग
मानसून के दौरान पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर गिरने से यातायात प्रभावित हो जाता है।
कई बार ग्रामीणों को रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर लगातार बने भूस्खलन के खतरे के कारण आवाजाही करना डरावना हो गया है।
खासकर बारिश के समय किसी भी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
टूटी सड़क से गुजरना मजबूरी
मोटर मार्ग के एक हिस्से में सड़क का बड़ा भाग क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसके बावजूद ग्रामीणों के पास आवाजाही के लिए कोई बेहतर विकल्प नहीं है।
लोगों का कहना है कि इस हिस्से की जल्द मरम्मत नहीं हुई तो यहां गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
5 साल से निर्माण अधूरा, ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण का काम करीब पांच साल से पूरा नहीं हो पाया है।
इस दौरान अधिकारियों की ओर से कई बार मौके का निरीक्षण किए जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही
लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
लोगों की मांग है कि सड़क निर्माण जल्द पूरा कराया जाए।
साथ ही भूस्खलन प्रभावित स्थानों पर मजबूत पुश्ते और अन्य सुरक्षा कार्य किए जाएं।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
इसी मार्ग से स्कूली बच्चे भी रोजाना आवाजाही करते हैं।
खराब सड़क और पहाड़ी से मलबा गिरने के खतरे के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान अचानक पत्थर या मलबा गिरने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।
मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी गंभीर
सड़क की परेशानी के साथ क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की कमजोर सुविधा भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
कई स्थानों पर नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को जरूरी फोन करने के लिए भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब होने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ने पर
एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क करने में परेशानी हो सकती है।

ग्रामीणों ने की सड़क और नेटवर्क सुधारने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मोटर मार्ग का अधूरा निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की है।
इसके अलावा सड़क पर जमा मलबा हटाने, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत पुश्ते बनाने और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की गई है।
लोगों ने क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान करने की भी अपील की है।
जिलाधिकारी ने जियोलॉजिकल सर्वे की बात कही
टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने बताया कि गांवों के आसपास लैंडस्लाइड की समस्या काफी अधिक है।
ऐसे क्षेत्रों में जियोलॉजिकल सर्वे कराया जाता है। सर्वे के बाद यह तय किया जाता है
कि संबंधित स्थान पर किस तरह के सुरक्षा या निर्माण कार्य किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर यह भी देखा जाता है
कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों के विस्थापन की आवश्यकता है या नहीं।
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