Joshimath News : जर्जर हालत में जोशीमठ का प्राचीन माता सीता मंदिर, BKTC को दानदाता का इंतजार

चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड के चाईं गांव में स्थित माता-सीता का पौराणिक और धार्मिक महत्व का मंदिर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार, यह उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो माता सीता को समर्पित है. वर्षों पुराना यह मंदिर अब पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है. हालात ऐसे हैं कि मंदिर में पूजा-अर्चना तक संभव नहीं रह गई है. माता-सीता की प्रतिमा को एक कमरे में स्थापित कर वहीं नियमित पूजा कराई जा रही है. ये मंदिर BKTC के अंतर्गत आता है. दिलचस्प बात ये है कि बीकेटीसी ने 2025-26 के लिए लगभग ₹127 करोड़ का वार्षिक बजट स्वीकृत किया था. इसके बावजूद उस पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं.

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि, यह मंदिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अधीन है, लेकिन लंबे समय से इसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई. ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर की खराब स्थिति को लेकर कई बार समिति को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

ग्रामीणों का कहना है कि, यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है. हर वर्ष यहां स्थानीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मंदिर की जर्जर स्थिति के कारण लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही है. उनका कहना है कि यदि समय रहते मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो इस ऐतिहासिक धरोहर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.

उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने भी मंदिर की स्थिति पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा,

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने पूर्व में कई अन्य मंदिरों के निर्माण और पुनर्निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है, लेकिन अपने ही अधीनस्थ इस महत्वपूर्ण मंदिर की लगातार उपेक्षा की जा रही है. माता सीता को समर्पित इस ऐतिहासिक मंदिर का संरक्षण और पुनर्निर्माण समिति की जिम्मेदारी है. बीकेटीसी प्रबंधन को शीघ्र मंदिर निर्माण की दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए.
-डॉ. बृजेश सती, महासचिव, उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत-

चाईं गांव के ग्राम प्रधान शंकर लाल ने बताया कि, पिछले तीन साल से लगातार मंदिर समिति को मंदिर की जर्जर स्थिति के बारे में जानकारी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि,

कई बार पत्र लिखे गए और मौखिक रूप से भी अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई. मंदिर की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए माता सीता की प्रतिमा को मंदिर से निकालकर एक कमरे में स्थापित करना पड़ा, जहां वर्तमान में पूजा-अर्चना की जा रही है.
-शंकर लाल, ग्राम प्रधान, चाईं गांव-

ग्राम प्रधान ने कहा कि ग्रामीणों की पहली प्राथमिकता मंदिर का संरक्षण और पुनर्निर्माण है. यदि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति किसी कारणवश इस मंदिर की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं है और अपना अधिकार छोड़ देती है, तो गांव के लोग स्वयं अपने संसाधनों और जनसहयोग से मंदिर का निर्माण कराने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर इस प्राचीन धार्मिक धरोहर को समाप्त नहीं होने देंगे.

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि, उत्तर भारत के इस दुर्लभ सीता मंदिर की उपेक्षा न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सांस्कृतिक विरासत की भी अनदेखी है. उनका कहना है कि सरकार और मंदिर समिति को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द पुनर्निर्माण की योजना बनानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपरा और विरासत को सुरक्षित देख सकें.

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने उम्मीद जताई है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर अब संबंधित विभाग और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति गंभीरता से विचार करेगी और माता सीता के इस प्राचीन मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए जल्द आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी. फिलहाल श्रद्धालुओं की आस्था एक अस्थायी कमरे में स्थापित माता सीता की प्रतिमा के सामने कायम है, लेकिन सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इस ऐतिहासिक मंदिर को उसका पुराना स्वरूप वापस कब मिल पाएगा.

बीकेसीटी के 45 अधीनस्थ मंदिर की सूची में माता सीता का पौराणिक मंदिर भी है. कई दानदाता मंदिर को बनाना चाहते हैं. कई दानदाताओं ने मंदिर समिति से मंदिर बनाने के लिए संपर्क साधा है. ग्रामीणों द्वारा मंदिर निर्माण की मांग पिछले काफी सालों से चल रही थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया.
-हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी-

गौरतलब है कि बीकेटीसी ने 2025-26 के लिए लगभग ₹127 करोड़ का वार्षिक बजट स्वीकृत किया था. ये बजट मुख्य रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा तैयारियों, व्यवस्था बनाने में खर्च होता है. मंदिरों की नियमित पूजन सामग्री भी इसी पैसे से खरीदी जाती है. एक अनुमान के तहत हर यात्रा सीजन में बीकेटेसी को चढ़ावे के रूप में 80 से 85 करोड़ रुपए की आय होती है.

 

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