ज्योलीकोट में दूषित पानी से 250 से ज्यादा बीमार, 2 मौतें; हाईकोर्ट सख्त

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के आसपास के कई गांव इन दिनों दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं।

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ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल समेत आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए हैं।

अब तक दो लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 250 से अधिक ग्रामीणों के बीमार होने की बात सामने आई है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है।

अदालत ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

ज्योलीकोट मामले में हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब

अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी

और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के सामने नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत सहित जल संस्थान

और जल निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पेयजल और सीवर व्यवस्था को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।

कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते पाइपलाइनों और सीवर व्यवस्था की मरम्मत कर दी जाती

तो ग्रामीणों को इस तरह की गंभीर स्थिति से गुजरना नहीं पड़ता।

हाईकोर्ट ने कहा- ज्योलीकोट में महामारी जैसी स्थिति

अदालत ने कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित वाटर टेस्टिंग लैब को जल्द मंजूरी देने के निर्देश पेयजल निगम के सचिव को दिए हैं।

इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को नैनीताल

और आसपास के करीब 20 से 25 जल स्रोतों से पानी के नमूने लेने के आदेश दिए गए हैं।

कोर्ट ने इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट छह दिनों के भीतर पेश करने को कहा है।

पीठ ने ज्योलीकोट क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को महामारी जैसी बताते हुए

जिलाधिकारी को राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए।

प्रभावित गांवों में टैंकरों के जरिए साफ पेयजल उपलब्ध कराने

और सीवर लीकेज की शिकायतों के लिए तत्काल हेल्पलाइन शुरू करने को भी कहा गया है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी हाईकोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की।

अदालत ने कहा कि 21वीं सदी में किसी इलाके में इस तरह की स्थिति पैदा होना बेहद गंभीर विषय है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं

तो जरूरत के अनुसार बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बुलाने में किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए।

इसी बीच जिलाधिकारी की ओर से निजी लैब में मरीजों के एलाइजा

और अन्य आवश्यक परीक्षण कराने के लिए चार लाख रुपये का बजट जारी किया गया है।

जरूरत बढ़ने पर इस राशि को और बढ़ाया जा सकता है।

याचिकाकर्ता की ओर से बड़ी संख्या में मरीजों की लिवर संबंधी रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष रखी गई।

प्रभावित लोगों के मुफ्त इलाज के साथ-साथ मुआवजे की मांग भी की गई है।

सीएमओ ने हाईकोर्ट को बताई स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां

सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने अदालत को बताया कि दूषित पानी की वजह से लोगों के बीमार होने की स्थिति सामने आई है।

प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीमें भेजी गई हैं।

विभाग के अनुसार, 8 डॉक्टरों की टीम, एक एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ क्षेत्र में तैनात किया गया है।

स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट भी वितरित कर रहे हैं।

जल संस्थान ने माना- पेयजल में पहुंचा सीवर का पानी

मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन और जल संस्थान के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया

कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास स्थित जल स्रोत में सीवर का पानी मिल गया था। माना जा रहा है

कि इसी वजह से पेयजल दूषित हुआ और क्षेत्र में बीमारी फैलने की स्थिति बनी।

इस पर हाईकोर्ट ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा

कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण समस्या पैदा हुई है

तो प्रभावित लोगों के इलाज और आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की ही होगी।

ज्योलीकोट में आखिर कितने लोग हुए प्रभावित?

नैनीताल जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ज्योलीकोट ब्लॉक के

आसपास के गांवों में कई दिनों से बीमारी फैलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

दूषित पानी की वजह से डायरिया, पेचिश, टाइफाइड, हैजा

और पीलिया जैसी बीमारियों के मामले सामने आने की बात कही जा रही है।

अब तक दो लोगों की मौत और 250 से अधिक लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है

कि समस्या सामने आने के बावजूद संबंधित विभागों को कई बार शिकायत की गई

लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

जिम्मेदारी किन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर?

ज्योलीकोट क्षेत्र में सामने आई इस स्थिति को लेकर प्रशासन

और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

नैनीताल जिले में कुमाऊं मंडल के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद हैं।

वर्तमान में दीपक रावत कुमाऊं कमिश्नर, ललित मोहन रयाल नैनीताल के जिलाधिकारी और डॉ. रश्मि पंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं।

ज्योलीकोट क्षेत्र नैनीताल विधानसभा के अंतर्गत आता है

जहां से बीजेपी की सरिता आर्या विधायक हैं।

यह क्षेत्र नैनीताल लोकसभा सीट का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व बीजेपी के अजय भट्ट करते हैं।

राज्य में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के पास है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है

कि दूषित पेयजल से पैदा हुई इस गंभीर समस्या को स्थायी रूप से दूर करने के लिए

प्रशासन और संबंधित विभाग आगे क्या कदम उठाते हैं।

 

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