Haridwar News : सरकारी स्कूल की बिल्डिंग की खराब हालत से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा , नई बिल्डिंग की मांग तेज हो गई

हरिद्वार में सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है. यहां शहर के बीचोंबीच स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 34 की बिल्डिंग जर्जर हो गई है. बारिश के कारण एक माह पहले जर्जर बिल्डिंग की एक कमरे की दीवारें और छत गिर गई थी. गनीमत रही कि बिल्डिंग की खराब हालत को देखते हुए डीएम के निर्देश पर पहले ही उस कमरे में बच्चों को बैठाना बंद कर दिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया. घटना के बाद एहतियातन पूरी पुरानी बिल्डिंग को उपयोग से बाहर कर दिया गया है. लेकिन अभी तक नई बिल्डिंग बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है. स्कूल में पढ़ने वाले 94 बच्चों की पढ़ाई दो छोटे कमरों में चल रही है. स्कूल के स्टाफ ने नई बिल्डिंग बनाने की मांग की है.

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जानकारी के अनुसार यह स्कूल आजादी के समय से संचालित है. कई सालों से स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हालत में है. कमरों की दीवारों में सीलन है. दीवारों के साथ साथ छत में भी पेड़ों की जड़ें जम गई हैं. बारिश के समय में तो बिल्डिंग गिरने का खतरा बढ़ जाता है. जर्जर बिल्डिंग को तोड़ा तो जा रहा है लेकिन नई बिल्डिंग बनाने पर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. जबकि यहां आज भी आसपास के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं. एक महीना पहले तेज बारिश में स्कूल के पीछे रेलवे लाइन से पानी का रिसाव हुआ और एक कमरे की दीवार ढह गई और छत भी गिर गई.

 

गनीमत रही कि डीएम मयूर दीक्षित ने स्कूल का निरीक्षण किया और बच्चों को पुरानी बिल्डिंग में न बैठाने के निर्देश दिए. डीएम के निर्देश पर स्कूल के स्टाफ ने बरसात के पहले से ही जर्जर बिल्डिंग में बच्चों को बैठाना बंद कर दिया था. जिसके चलते बड़ा हादसा टल गया था. बिल्डिंग गिरने के बाद स्कूल के स्टाफ को नजर रखनी पड़ती है, ताकि कोई बच्चा खंडहर की तरफ न जाए. वर्तमान में यहां कुल 94 बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई केवल दो छोटे कमरों में संचालित की जा रही है.

भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में है. एक कमरे में दो क्लास चल रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. पहले एक कमरे में एक ही क्लास चलती थी और बच्चों को आसानी से पढ़ाया जा रहा था. स्कूल की दीवार और छत गिरने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर दो नए कमरों में पांच क्लास चल रही हैं. नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए पहले भी उच्च को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसलिए उनके मांग है कि जल्द से जल्द नई बिल्डिंग का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े.
-सपना रानी,स्कूल की प्रिंसिपल

सीमित स्थान के कारण बच्चों को एक साथ बैठाने में परेशानी हो रही है. क्षमता से अधिक बच्चों के होने के कारण शिक्षकों को भी पढ़ाई कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. दो कमरों में पर्याप्त जगह न होने से बच्चों का भी पढ़ाई से ध्यान भटकता है और पढ़ाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा है. हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र में भी चार स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर हो गई थी. उनमें तो खुले आसमान के नीचे बच्चे पढ़ने को मजबूर थे. लेकिन ये चारों स्कूल किराए की बिल्डिंग में चल रहे थे.

मानसून से पहले सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जर्जर भवनों को सील किया जाए और उनमें किसी के भी जाने पर रोक लगाई जाए. गिरासू भवनों को तोड़ने के भी निर्देश दिए गए हैं. पूर्व में कई पुराने भवनों को तोड़कर नवनिर्माण कराया गया है. विभागीय अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है कि पुराने भवनों को तोड़ने और नवनिर्माण के प्रस्ताव बनाकर जिला प्रशासन को भेजा जाए.
-मयूर दीक्षित, डीएम हरिद्वार-

इसलिए मानसून से पहले प्रशासन ने चारों स्कूलों को एक ही स्कूल में मर्ज कर दिया था. अब चारों स्कूल का स्टाफ एक ही स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहा है, लेकिन इन स्कूलों के नए भवनों के निर्माण का रास्ता अभी साफ नहीं हो सका है.

 

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