मोदी सरकार वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान सम्मान दिलाने के लिए एक नया प्रोटोकॉल तैयार करने की योजना बना रही है। हाल ही में गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। बता दें कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन 1905-08 के दौरान आजादी का प्रतीक बनकर उभरा था। सरकार अब इसे उसी गौरवमयी स्थान पर पुनर्स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय की बैठक में राष्ट्रीय गीत के गायन के नियमों, स्थान और समय के बारे में चर्चा हुई। इसमें यह सवाल उठाया गया कि क्या वंदे मातरम के गायन के दौरान खड़ा होना अनिवार्य किया जाना चाहिए और क्या इसके अपमान पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह भी चर्चा की गई कि क्या वंदे मातरम को राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण प्राप्त होना चाहिए।
पिछले कुछ सालों में अदालतों में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें वंदे मातरम के लिए भी राष्ट्रगान जैसे नियम और प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने 2022 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वंदे मातरम के लिए अब तक कोई दंडात्मक प्रावधान जारी नहीं किए गए हैं।