देहरादून: उत्तराखंड में NEET UG के जरिए MBBS दाखिलों में कथित फर्जी स्वतंत्रता सेनानी
आश्रित प्रमाणपत्र के इस्तेमाल का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।
जांच आगे बढ़ने के साथ नए नाम और कड़ियां सामने आ रही हैं।
22 सितंबर को SIT ने मेरठ निवासी रूपेश पंडित और आरोपी छात्रा के पिता अरविंद को गिरफ्तार किया था।
अब 24 सितंबर को जांच टीम ने दिल्ली से धीरज श्रीवास्तव नाम के एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है।
उसके पास से करीब 5.5 लाख रुपये बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक रूपेश पंडित से पूछताछ और उसकी निशानदेही के आधार पर भी नकदी बरामद की गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि धीरज और रूपेश के बीच संपर्क था
और धीरज कमीशन के आधार पर MBBS में दाखिले कराने से जुड़ा था।
45 लाख रुपये तक में सौदे की बात सामने आई
SIT की शुरुआती जांच में कथित तौर पर प्रति अभ्यर्थी करीब 45 लाख रुपये में दाखिले से जुड़ी डील किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार रूपेश पंडित पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने
और मेडिकल दाखिले की व्यवस्था से जुड़ी भूमिका का आरोप है।
जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे
अभ्यर्थियों से रकम किस माध्यम से ली जाती थी और उसका बंटवारा किन लोगों के बीच होता था।
बैंक खातों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक ही नाम के आधार पर कई प्रमाणपत्रों की जांच
मामले की जांच में चार अभ्यर्थियों के दस्तावेज सामने आए हैं, जिनमें स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए
धर्मवीर वर्मा नाम का उल्लेख किया गया था। प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच में इस नाम से स्वतंत्रता सेनानी होने का रिकॉर्ड
नहीं मिलने के बाद प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठे।
SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आवेदन तैयार करने, दस्तावेज जुटाने, ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने
और प्रमाणपत्र के सत्यापन तक किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच में चार अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते भी सत्यापन के दौरान संदिग्ध पाए गए हैं।
गिरोह में अलग-अलग लोगों को दी गई थी अलग जिम्मेदारी
पुलिस की शुरुआती पड़ताल के मुताबिक यह पूरा काम अलग-अलग भूमिकाओं में बंटा हुआ हो सकता है।
कुछ लोग MBBS में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से संपर्क करते थे
जबकि दूसरे लोग उनकी पात्रता और श्रेणी के अनुसार दस्तावेज तैयार कराने की व्यवस्था करते थे।
इसके बाद दाखिले की प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
SIT यह जानने का प्रयास कर रही है कि अभ्यर्थियों से संपर्क करने से लेकर
मेडिकल कॉलेज तक दाखिला कराने के बीच कितने लोग सक्रिय थे।
मेरठ में कंसल्टेंसी चलाता था रूपेश पंडित
पुलिस के अनुसार बिहार निवासी रूपेश पंडित पिछले कई वर्षों से मेरठ में शिक्षा से जुड़ी कंसल्टेंसी संचालित कर रहा था।
जांच में उसके MBBS के अलावा अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिले कराने से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस अब उसकी कंसल्टेंसी से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को यह भी जानकारी मिली है
कि उसके संपर्क विदेशों में संचालित कुछ विश्वविद्यालयों तक भी थे।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए MBBS दाखिले का मामला कैसे सामने आया?
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक जांच में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी के तहत दाखिला लेने वाले कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की गई।
चार छात्राओं के प्रमाणपत्रों को लेकर अनियमितताएं सामने आने के बाद उनके दाखिलों को रद्द किया गया और पुलिस में मामले दर्ज किए गए।
इसके बाद जांच को आगे बढ़ाने के लिए SIT गठित की गई। टीम ने SDM कार्यालय में जाकर प्रमाणपत्रों से जुड़ी फाइलें और राजस्व रिकॉर्ड खंगाले तथा संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की।
दो लेखपाल भी जांच के घेरे में
प्रमाणपत्रों के सत्यापन में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद दो लेखपालों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
SIT अब यह जांच कर रही है कि प्रमाणपत्र तैयार करने और सत्यापन की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
राजस्व विभाग से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बयानों का भी दस्तावेजों से मिलान किया जा रहा है।
आरोपियों के मोबाइल और वित्तीय लेनदेन की जांच
SIT ने आरोपियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। मोबाइल फोन की चैट, कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों
और अन्य डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इसके साथ ही बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की पड़ताल भी की जा रही है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है
कि कथित तौर पर ली गई रकम किन लोगों तक पहुंची और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
24 सितंबर तक तीन गिरफ्तारियां
इस मामले में 22 सितंबर को SIT ने रूपेश पंडित और अरविंद को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद 24 सितंबर को दिल्ली से धीरज श्रीवास्तव की गिरफ्तारी की गई।
उसके पास से करीब 5.5 लाख रुपये बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है।
SIT की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
इसलिए मामले में सामने आए आरोपों और संदिग्धों की भूमिका को अंतिम रूप से जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट माना जाएगा।
NEET UG MBBS फर्जी सर्टिफिकेट मामला: अब तक की टाइमलाइन
- 3 सितंबर: फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े मामले को लेकर शिकायत प्रशासन के स्तर पर पहुंची।
- 5 सितंबर: मामले की जांच के निर्देश दिए गए।
- 9 सितंबर: प्रशासन की ओर से जांच समिति गठित की गई।
- 10 सितंबर: कुछ अभ्यर्थियों के नाम पर जारी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों को निरस्त किया गया।
- 13 सितंबर: रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए।
- 18 सितंबर: मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई।
- 19-20 सितंबर: SIT ने राजस्व रिकॉर्ड, प्रमाणपत्रों से जुड़ी फाइलों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की।
- 22 सितंबर: रूपेश पंडित और अरविंद को गिरफ्तार किया गया।
- 24 सितंबर: दिल्ली से धीरज श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया और उसके पास से करीब ₹5.5 लाख बरामद किए गए।
MBBS दाखिले के बाद नियमों में भी बदलाव
फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद उत्तराखंड में MBBS दाखिले के दस्तावेज सत्यापन को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार अब दस्तावेजों का पूरा सत्यापन होने तक दाखिले को अंतिम नहीं माना जाएगा।
मामले की जांच अभी जारी है। SIT की पड़ताल आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है
कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उनके आधार पर दाखिले की प्रक्रिया में वास्तव में कितने लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी।
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