Dehradun News : संरक्षित कछुआ पालना युवक को पड़ा भारी, हाथों में कस गई हथकड़ी - Uttarakhand Highlights

Dehradun News : संरक्षित कछुआ पालना युवक को पड़ा भारी, हाथों में कस गई हथकड़ी

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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रतिबंधित वन्यजीवों को घर में रखने का एक और मामला सामने आया है. जहां मालसी रेंज के कांवली क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर दो इंडियन रूफ्ड टर्टल बरामद किए हैं. मुखबिर की सूचना पर की गई कार्रवाई में 27 वर्षीय युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

पूछताछ में युवक ने दावा किया कि उसे कछुओं को घर में रखना अवैध होने की जानकारी नहीं थी और वो इन्हें एक दोस्त से लेकर आया था. वन विभाग अब यह जांच कर रहा है कि कछुए कहां से लाए गए और इन्हें रखने के पीछे सिर्फ शौक था या फिर इनके अवैध कारोबार की भी योजना थी.

दो संरक्षित कछुए बरामद: देहरादून जैसे शहरी क्षेत्र में भी प्रतिबंधित वन्यजीवों को पालने और उनकी तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. कुछ समय पहले प्रतिबंधित प्रजाति के तोतों की तस्करी के मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी की गई थी. वहीं, अब एक बार फिर वन विभाग की कार्रवाई में दो संरक्षित कछुए बरामद किए गए हैं.

मामला देहरादून डिवीजन की मालसी रेंज का है. कांवली क्षेत्र में एक घर के भीतर प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए रखे जाने की सूचना वन विभाग को मुखबिर के जरिए मिली थी. सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई की और टीम को संबंधित घर पर भेजा गया। छापेमारी के दौरान टीम को वहां दो इंडियन रूफ्ड टर्टल मिले.

14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया युवक: वन विभाग की टीम ने दोनों कछुओं को कब्जे में लेकर सुरक्षित रूप से विभागीय कार्यालय पहुंचाया. इसके साथ ही घर में कछुओं को रखने वाले 27 वर्षीय युवक को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के बाद आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

वन विभाग अब इस पूरे मामले की जांच कर रहा है कि दोनों कछुए युवक तक कैसे पहुंचे? पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वो कछुओं को अपने एक दोस्त से लेकर आया था. उसका कहना है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि इंडियन रूफ्ड टर्टल को घर में रखना कानूनन अपराध है. हालांकि, वन विभाग इस दावे की भी जांच कर रहा है कि कछुओं को केवल शौक के लिए रखा गया था या फिर आगे इनके बेचने की कोई योजना थी.

मामले की जांच एसडीओ स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है. जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की जाएगी. साथ ही विभाग ये भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कछुओं को उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति कौन है और क्या इस पूरे मामले में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है?

Indian Roofed Turtle

क्या है इंडियन रूफ्ड टर्टल ? इंडियन रूफ्ड टर्टल का वैज्ञानिक नाम पंगशुरा टेक्टा (Pangshura Tecta) है. इसका नाम इसके खोल की खास बनावट के कारण पड़ा है. इसके ऊपरी कवच का आकार छत जैसी ऊंचाई लिए होता है, जो इसे दूसरी कछुआ प्रजातियों से अलग पहचान देता है. यह मुख्य रूप से नदियों, नहरों और अन्य मीठे पानी के जलस्रोतों में पाया जाता है. यह पानी में रहने वाला कछुआ है और अक्सर चट्टानों, लकड़ियों या जलस्रोतों के किनारे धूप सेंकता दिखाई देता है.

इंडियन रूफ्ड टर्टल की पहचान इसके ऊंचे और विशिष्ट खोल के अलावा सिर और गर्दन पर दिखाई देने वाली पीली या नारंगी धारियों से भी की जा सकती है. यह सामान्य तौर पर मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है और जलीय वनस्पतियों समेत विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों पर निर्भर करता है. इसकी अधिकतम लंबाई करीब 20 से 23 सेंटीमीटर तक हो सकती है.

कई लोग जानकारी के अभाव में कछुओं को घर में पालने के लिए ले आते हैं. कुछ लोग इन्हें पालतू जानवर समझते हैं. जबकि, कई प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित होती हैं. इंडियन रूफ्ड टर्टल के संबंध में वन विभाग की ओर से इसे संरक्षित प्रजाति के रूप में कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में इसे पकड़ना, घर में रखना, खरीदना या बेचना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है.

 

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