Uttarakhand News : आईआईटी रुड़की की राहत पर छात्रों ने उठाए सवाल, कहा-पात्रता कैसे होगी पूरी

आईआईटी रुड़की ने 12वीं बोर्ड में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को भी फिलहाल जोसा काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने और अपनी पसंद (चॉइस) भरने की अनुमति दी है, जिससे सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। छात्रों का कहना है कि यह राहत अधूरी है क्योंकि 15 जुलाई तक संशोधित स्कोर कार्ड जमा करने की शर्त व्यावहारिक नहीं है।

दरअसल आईआईटी रुड़की ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि सामान्य, ओबीसी-एनसीएल और ईडब्ल्यूएस वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के 12वीं में 75 प्रतिशत से कम अंक हैं तथा एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के 65 प्रतिशत से कम अंक हैं, वे फिलहाल अपनी जेईई रैंक के आधार पर सीट आवंटन प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। लेकिन उन्हें 15 जुलाई तक पात्रता पूरी करने वाला संशोधित स्कोरकार्ड जमा करना होगा। अंतिम प्रवेश इसी शर्त के पूरा होने पर निर्भर करेगा।

इसके विरोध में एक्स पर छात्रों ने लिखा है कि पुनर्मूल्यांकन और इम्प्रूवमेंट परीक्षा की प्रक्रिया अभी जारी है, जबकि कुछ बोर्डों में सुधार परीक्षा जुलाई के मध्य में प्रस्तावित है। ऐसे में 15 जुलाई तक संशोधित अंकपत्र उपलब्ध होना मुश्किल है। रवि नामक एक छात्र ने लिखा कि यूपी बोर्ड ने उन्हें अंक सुधारने का कोई अवसर नहीं दिया। गलत मूल्यांकन के कारण उन्हें 72.2 प्रतिशत अंक मिले और अब उनके पास पात्रता पूरी करने का कोई रास्ता नहीं बचा है। 

75 प्रतिशत बोर्ड अंक नियम पर पुनर्विचार की मांग 

वहीं लक्षित ने आईआईटी रुड़की और जोसा अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि पुनर्मूल्यांकन और सुधार परीक्षा के परिणाम 15 जुलाई के बाद आने की संभावना है, इसलिए सभी प्रभावित छात्रों को समान अवसर देने के लिए अंतिम तिथि बढ़ाई जानी चाहिए।

प्रणव जैन ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि यह किसी एक वर्ग या श्रेणी का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों छात्रों को प्रभावित करने वाली व्यापक समस्या है और अधिकांश छात्रों को अभी भी 75 प्रतिशत अंक की शर्त पूरी करनी है, लेकिन परिणामों में देरी उनके नियंत्रण से बाहर है। फुरकान असलम और सब्यसाची हसन जैसे कई उपयोगकर्ताओं ने भी 75 प्रतिशत बोर्ड अंक नियम पर पुनर्विचार की मांग की है।

नियमों में बदलाव पहले भी किए जा चुके
वहीं रेखा ने लिखा कि 15 जुलाई को होने वाली इम्प्रूवमेंट परीक्षा के परिणाम इतनी जल्दी जारी होना संभव नहीं है, इसलिए अंतिम तिथि अगस्त तक बढ़ाई जानी चाहिए। कुछ अभ्यर्थियों ने सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए पात्रता सीमा 75 प्रतिशत से घटाकर 65 प्रतिशत तथा एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के लिए 55 प्रतिशत करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कोविड काल का हवाला देते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों में नियमों में बदलाव पहले भी किए जा चुके हैं।

प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता 75 प्रतिशत की शर्त से अधिक 15 जुलाई की समय सीमा को लेकर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि राहत का उद्देश्य योग्य छात्रों को अवसर देना है तो उसे वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप भी होना चाहिए। अब सभी की निगाहें आईआईटी रुड़की और जोसा पर टिकी हैं कि वे छात्रों की इन मांगों पर कोई पुनर्विचार करते हैं या नहीं।

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