विकासनगर: जौनसार-बावर क्षेत्र में भारी बारिश के बीच अमलावा नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से नराया समेत आसपास के गांवों के ग्रामीणों के सामने आवाजाही का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं।
दरअसल, वर्ष 2013 की आपदा में अमलावा नदी पर बने कई पुल बह गए थे। करीब 13 साल बीत जाने के बाद भी कई स्थानों पर इन पुलों का दोबारा निर्माण नहीं हो सका है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में नदी पार कर खेतों और दूसरी जरूरी जगहों तक पहुंचना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक अमलावा नदी पर पहले करीब एक दर्जन पुल थे, जो लगातार आई आपदाओं में क्षतिग्रस्त हो गए। पुल नहीं होने से पानुवा, मलेथा, उदपाल्टा, कुरोली, कोठा तारली, सैंज, सैंसा, नराया, चिबऊ, कोटि और कोरूवा समेत कई गांवों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई ग्रामीण एक-दूसरे का सहारा लेकर या डंडों की मदद से नदी पार करते हैं।
नदी के दूसरी ओर सलगा, बोहा और नराया गांव के करीब 25 परिवारों की कृषि भूमि और पशुशालाएं हैं। इसके अलावा कई गांवों के लिए नदी के पार पैदल रास्ता भी है। ऐसे में पुल या पुलिया के अभाव में ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा का आवागमन मुश्किल बना हुआ है।
पूर्व प्रधान श्रीचंद तोमर का आरोप है कि ग्रामीण कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि बरसात के दौरान स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
वहीं, एसडीएम कालसी प्रेमलाल ने कहा कि क्षतिग्रस्त पुलों के साथ-साथ नए पुलों के निर्माण को लेकर संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से दिए जा रहे आश्वासन कब धरातल पर उतरते हैं और ग्रामीणों को इस खतरनाक सफर से कब राहत मिलती है।
