देहरादून: उत्तराखंड सरकार प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रस्तावित ईवी नीति के प्रावधानों पर चर्चा हुई। सरकार अब देश के दूसरे राज्यों में लागू इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों का अध्ययन कर उत्तराखंड के लिए अधिक प्रभावी नीति तैयार करेगी।
पुराने प्रस्ताव में कई बड़ी रियायतों का प्रावधान
उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किए गए मसौदे में वाहन खरीदारों को कई तरह की आर्थिक राहत देने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर रजिस्ट्रेशन फीस और रोड टैक्स में 100 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान शामिल था।
इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए स्थायी पूंजी निवेश पर भी सब्सिडी का प्रस्ताव रखा गया था। मैदानी क्षेत्रों में 80 प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्रों में 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की बात मसौदे में प्रस्तावित की गई थी।
हालांकि, कैबिनेट में चर्चा के बाद सरकार ने इन प्रावधानों को अंतिम रूप देने से पहले दूसरे राज्यों की EV नीतियों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर एवं व्यावहारिक नीति तैयार करना है।
परिवहन और उद्योग विभाग मिलकर तैयार करेंगे नीति
दरअसल, प्रदेश में EV पॉलिसी तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरी है। शुरुआत में सेतु आयोग ने परिवहन विभाग के साथ मिलकर नीति का प्रारूप तैयार किया था। बाद में शासन स्तर पर फैसला लिया गया कि EV पॉलिसी का मसौदा उद्योग विभाग तैयार करेगा।
इसके बाद परिवहन और उद्योग विभाग की अलग-अलग नीतियां बनाने के बजाय दोनों विभागों के सुझावों को एक ही नीति में शामिल करने पर सहमति बनी। इसी आधार पर उद्योग विभाग ने EV पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया।
अब कैबिनेट के निर्देश के बाद इस मसौदे में दूसरे राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं और प्रावधानों को शामिल करने की संभावना है।
EV चार्जिंग नेटवर्क बढ़ाने पर जोर
प्रस्तावित नीति का एक बड़ा उद्देश्य उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। सरकार चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार के साथ-साथ EV से जुड़े निवेश को आकर्षित करने की दिशा में भी काम करना चाहती है।
पर्वतीय क्षेत्रों में चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि पहाड़ी जिलों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सके।
लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस
नई EV नीति में केवल निजी कारों और दोपहिया वाहनों तक सीमित रहने के बजाय सार्वजनिक परिवहन और व्यावसायिक वाहनों को भी बढ़ावा देने की योजना है। लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिक दोपहिया और कमर्शियल चारपहिया वाहन इसके प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाकर उत्तराखंड को देश के सबसे अधिक EV-अनुकूल पर्वतीय राज्यों में शामिल करना है।
EV सेक्टर में रोजगार और निवेश को बढ़ावा
प्रस्तावित नीति में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें बैटरी निर्माण, EV असेंबली, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मरम्मत एवं रखरखाव और बैटरी रिसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने की योजना है।
इसके साथ ही EV क्षेत्र में डिजाइन, रिसर्च, इनोवेशन और कौशल विकास के जरिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
पर्यटन और तीर्थ मार्गों पर भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
उत्तराखंड में EV नीति का इस्तेमाल पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा सकता है। पर्यटन स्थलों, तीर्थयात्रा मार्गों और राष्ट्रीय उद्यानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना प्रस्तावित है।
इससे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के साथ प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। सरकार का व्यापक लक्ष्य राज्य की वायु गुणवत्ता में सुधार और देश के दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य में योगदान देना है।
दूसरे राज्यों की नीतियों के बाद तय होगा अंतिम स्वरूप
सरकार अब दूसरे राज्यों में लागू EV नीतियों में दी जा रही छूट, सब्सिडी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश प्रोत्साहन जैसे प्रावधानों का अध्ययन करेगी। इसके बाद उत्तराखंड के लिए EV पॉलिसी को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
यानी फिलहाल प्रस्तावित सब्सिडी और अन्य रियायतें अंतिम नहीं मानी जा रही हैं। दूसरे राज्यों के मॉडल का अध्ययन करने के बाद उत्तराखंड की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी में बदलाव किए जा सकते हैं।
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