Kotdwar : रेलवे स्टेशन के बाहर अतिक्रमण पर विवाद, 59 दुकानदारों को नोटिस; बाजार बंद कर व्यापारियों का प्रदर्शन

कोटद्वार: अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कोटद्वार रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण और कायाकल्प के बाद अब स्टेशन के बाहर अतिक्रमण हटाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रेलवे की मांग पर स्थानीय प्रशासन ने स्टेशन के प्रवेश और निकासी मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की है। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी ने सड़क किनारे दुकानें संचालित कर रहे 59 दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए हैं।

नोटिस मिलने के बाद दुकानदारों ने कार्रवाई के विरोध में धरना शुरू कर दिया। उनका धरना लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। दुकानदारों के समर्थन में व्यापार मंडल भी सामने आया और उसके आह्वान पर कोटद्वार बाजार बंद रखा गया।

स्टेशन के बाहर बनाए गए हैं दो बड़े गेट

कोटद्वार रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं और नए स्वरूप के साथ विकसित किया जा रहा है। स्टेशन के प्रवेश और निकासी के लिए दो बड़े गेट तैयार किए गए हैं।

रेलवे की ओर से इन गेटों के सामने और आसपास के रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई करने को कहा गया। इसके बाद संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।

जांच के दौरान सामने आया कि स्टेशन के बाहर सड़क किनारे कई दुकानें पीडब्ल्यूडी की भूमि पर संचालित हो रही हैं। इसके बाद विभाग ने 59 दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी कर दिए।

सात दिन से धरने पर बैठे दुकानदार

नोटिस मिलने के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि वे लंबे समय से यहां कारोबार कर रहे हैं और अचानक हटाए जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

दुकानदारों के आंदोलन को अब स्थानीय व्यापारियों का भी समर्थन मिल गया है। व्यापार मंडल के आह्वान पर कोटद्वार बाजार बंद रहा। व्यापारियों और दुकानदारों ने धरना स्थल से तहसील तक जुलूस निकाला और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री से पुनर्वास की मांग

प्रदर्शन के बाद व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा। व्यापारियों ने मांग की कि दुकानदारों को सीधे हटाने के बजाय पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

व्यापार मंडल का कहना है कि स्टेशन के बाहर वर्षों से दुकानें संचालित हो रही हैं और इनसे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले प्रभावित दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

दुकानदार बोले- कार्रवाई से पहले मिले वैकल्पिक स्थान

दुकानदारों का तर्क है कि यदि रेलवे स्टेशन के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है, तो उन्हें किसी दूसरे स्थान पर व्यवस्थित तरीके से बसाया जाए।

व्यापारियों का कहना है कि पुनर्वास की व्यवस्था होने से स्टेशन के विकास का काम भी प्रभावित नहीं होगा और लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों की आजीविका भी बचाई जा सकेगी।

फिलहाल कोटद्वार रेलवे स्टेशन के बाहर अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन और दुकानदारों के बीच विवाद बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और व्यापारियों के रुख पर सभी की नजर रहेगी।

 

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