देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से सख्त कदम उठाने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि कुछ मामलों में कथित तौर पर गलत जानकारी के आधार पर योग्य मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने ऐसे मामलों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई और दंड का प्रावधान करने की मांग उठाई है।
गलत जानकारी देकर वोट कटवाने की कोशिश पर कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत तथ्यों के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास करता है और इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य या दुर्भावना होती है, तो इसे सामान्य आवेदन की प्रक्रिया मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। पार्टी ने मांग की कि ऐसे मामलों में आवेदनकर्ता की मंशा की जांच हो और दोष साबित होने पर उचित कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटने से रोकने के लिए चुनाव आयोग को प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए।
विधानसभा स्तर की सुनवाई में कांग्रेस तैनात करेगी प्रतिनिधि
कांग्रेस के मुताबिक, पार्टी ने इस मामले को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन प्रतिनिधिमंडल को समय नहीं मिल सका। इसके बाद पार्टी ने विधानसभा स्तर पर होने वाली सुनवाई के दौरान अपने प्रतिनिधियों और संबंधित विषय की जानकारी रखने वाले लोगों को मौजूद रखने का फैसला किया है।
पार्टी का कहना है कि प्रत्येक आपत्ति और मतदाता के मामले को तथ्यों के आधार पर देखा जाएगा। कांग्रेस के प्रतिनिधि यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि किसी योग्य मतदाता का नाम गलत प्रक्रिया के चलते मतदाता सूची से बाहर न हो।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राज्य स्तर पर अधिकारियों के सामने भी इस विषय को कई बार उठाया जा चुका है, लेकिन पार्टी को अब तक अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आई है। कांग्रेस ने कहा कि गलत जानकारी के आधार पर आवेदन करने वालों के खिलाफ स्पष्ट दंडात्मक व्यवस्था नहीं होने से ऐसी शिकायतों की आशंका बनी रहती है।
पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट नियम, जांच प्रक्रिया और दंड का प्रावधान किया जाए। कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक ले जाया जा सकता है।
खड़गे के बयान को धामी की टिप्पणी का जवाब बताया
वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान को भी प्रमुखता से उठाया, जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की टिप्पणी के जवाब में दिया गया था।
गोदियाल के मुताबिक, खड़गे ने अपने लंबे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री की टिप्पणी का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब पुष्कर सिंह धामी का जन्म भी नहीं हुआ था, उस समय वह कर्नाटक में विधायक के तौर पर काम कर चुके थे और विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में भी वहां जा चुके थे।
गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन को देखते हुए उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।
उन्होंने खड़गे के हवाले से कर्नाटक की राजनीति का एक पुराना प्रसंग भी सामने रखा। उनके अनुसार, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गुलबर्गा आते थे, उस समय कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री धर्म सिंह ने भाजपा नेताओं का सम्मान किया और उन्हें आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं।
कांग्रेस ने खड़गे के बयान को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की टिप्पणी का जवाब बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं में इसे लेकर संतोष है। पार्टी का कहना है कि इस बयान के जरिए कांग्रेस ने राजनीतिक बहस में अपना पक्ष मजबूती से रखा है।
