ऋषिकेश: देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-07) के भानियावाला से ऋषिकेश खंड पर प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण परियोजना के लिए 3000 से अधिक पेड़ों की कटाई की योजना का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. स्थानीय युवाओं, ‘जेन-जी’ (Gen-Z) पीढ़ी, पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने इस योजना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए सरकार और संबंधित विभागों से वैकल्पिक समाधान तलाशने की मांग की है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बेहतर सड़क और यातायात व्यवस्था समय की जरूरत है, लेकिन इसके लिए हजारों हरे-भरे और वर्षों पुराने पेड़ों की बलि देना उचित नहीं है. उनका कहना है कि ये पेड़ केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के तापमान को नियंत्रित रखने, वायु प्रदूषण कम करने, भूजल संरक्षण और पक्षियों व अन्य जीवों के प्राकृतिक आवास के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
युवाओं ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर भी जोर-शोर से उठाया है. विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर पेड़ों को बचाने के समर्थन में अभियान चलाए जा रहे हैं. लोगों से इस मुहिम से जुड़ने की अपील की जा रही है. कई स्थानों पर हस्ताक्षर अभियान और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए जा रहे हैं.
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि परियोजना की डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाएं या आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए तो बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाया जा सकता है. उनका आग्रह है कि विकास कार्यों को इस तरह से लागू किया जाए, जिससे पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. उनका स्पष्ट संदेश है कि विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते योजनाओं में संवेदनशीलता और दूरदर्शिता दिखाई जाए.
वहीं, इस परियोजना को लेकर संबंधित विभागों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण से देहरादून और ऋषिकेश के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करने, जाम से राहत देने और यात्रा को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने में मदद मिलेगी. हालांकि, पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी सभी की नजर बनी हुई है.