हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी कुंभ मेले को लेकर तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
शहर को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कुंभ मेले के बजट से पांच स्थायी पुल, करीब 4.5 किलोमीटर लंबे गंगा घाट और कई सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा शहर की पुरानी इमारतों की रंगाई-पुताई और प्रमुख मार्गों पर धार्मिक चित्रकारी का काम भी जारी है।
कुंभ मेले से पहले हरिद्वार को एक नई पहचान देने की योजना के तहत शहर की प्राचीन इमारतों को एक समान रंग में सजाया जा रहा है।
खासतौर पर हरकी पैड़ी, गंगा घाटों और कनखल क्षेत्र की लगभग 150 साल पुरानी इमारतों के बाहरी स्वरूप को एकरूप बनाया जा रहा है।
वहीं, हाईवे के फ्लाईओवर और रेलवे अंडरपास की दीवारों पर देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और साधु-संतों के चित्र उकेरे जा रहे हैं।
कनखल की ऐतिहासिक इमारतों को दिया जा रहा नया स्वरूप
हरिद्वार के प्राचीन धार्मिक क्षेत्रों में शामिल कनखल अपनी ऐतिहासिक विरासत, मंदिरों, मठों और अखाड़ों के लिए जाना जाता है।
यहां मौजूद कई पुरानी इमारतें लंबे समय से शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही हैं।
इन भवनों को आकर्षक और एक समान स्वरूप देने के लिए पीले रंग से रंगाई-पुताई कराई जा रही है।
इसके साथ ही दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साइन बोर्ड भी भगवा रंग में तैयार किए जा रहे हैं।
प्रशासन का प्रयास है कि कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश करते ही
हरिद्वार की धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत का अनुभव हो।
फ्लाईओवर और अंडरपास की दीवारों पर दिखेगी सनातन संस्कृति
शहर के प्रमुख हाईवे फ्लाईओवर और रेलवे अंडरपास की दीवारों को भी आकर्षक बनाया जा रहा है।
इन स्थानों पर धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित चित्रकारी की जा रही है।
दीवारों पर देवी-देवताओं, प्राचीन ऋषि-मुनियों और साधु-संतों के चित्र बनाए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य चित्रों के माध्यम से भारतीय सभ्यता, सनातन परंपराओं और धार्मिक विरासत को प्रदर्शित करना है
ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु हरिद्वार की सांस्कृतिक पहचान से परिचित हो सकें।
कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार, रंगाई-पुताई और सौंदर्यीकरण के अधिकांश कार्य नवंबर के अंत तक पूरे करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
स्थानीय लोगों ने की प्रशासन की पहल की सराहना
शहर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है।
नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी का कहना है कि चित्रों का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
कई बार एक तस्वीर वह संदेश दे देती है, जिसे समझाने के लिए हजार शब्द भी कम पड़ जाते हैं।
उन्होंने दीवारों पर धार्मिक देवी-देवताओं के चित्र बनाने की पहल को प्रशासन का सराहनीय कदम बताया।
एसएमजेएन कॉलेज के प्राचार्य सुनील बत्रा के अनुसार, दीवारों पर प्राचीन संस्कृति
और वेदों की ऋचाओं को प्रदर्शित करना एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे यहां से गुजरने वाले श्रद्धालुओं
को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।
खासतौर पर युवा पीढ़ी पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, कनखल निवासी सुनील दत्त पांडे ने बताया कि कुंभ मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं।
ऐसे में शहर की सुंदरता के साथ उसकी धार्मिक पहचान को भी संजोना जरूरी है।
उन्होंने कनखल के पुराने भवनों और मंदिरों के सौंदर्यीकरण का सुझाव दिया था।
अब क्षेत्र में रंगाई-पुताई और मंदिरों को आकर्षक बनाने का काम किया जा रहा है।
नवंबर के अंत तक पूरा होगा सौंदर्यीकरण का कार्य
अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए
हरिद्वार को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य कराए जा रहे हैं।
शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्राथमिकता देते हुए पुराने भवनों
प्रमुख मार्गों और फ्लाईओवर को आकर्षक बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कनखल की ऐतिहासिक इमारतों को एक समान रंग में सजाने
और प्रमुख स्थानों पर धार्मिक चित्रकारी कराने की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों को दी गई है।
इस कार्य में एचआरडीए और एनएचएआई समेत कई विभाग जुटे हुए हैं।
प्रशासन ने नवंबर के अंतिम सप्ताह तक इन कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
ये भी पढ़े : https://uttarakhandhighlights.com/2026/11/04/tehri-drunk-bus-driver-28-chardham-pilgrims-saved/
![]()