Pakistan Drone Attacks: पाकिस्तान में अफगानिस्तान सीमा के पास बढ़ते ड्रोन हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
ड्रोन हमलों से निपटने के लिए पाकिस्तान की सेना और पुलिस ने अब एक बेहद सस्ता और असामान्य उपाय अपनाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के संवेदनशील इलाकों में कई पुलिस
और सैन्य चौकियों के ऊपर मछली पकड़ने वाले जाल (Fishing Nets) लगाए जा रहे हैं।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
(TTP) की ड्रोन आधारित गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर TTP को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है
हालांकि काबुल इन आरोपों से इनकार करता है।
हंगू में ड्रोन हमले के बाद बढ़ी चिंता
खैबर पख्तूनख्वा का हंगू जिला अफगानिस्तान सीमा के काफी करीब है और पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों पर हमलों का प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है।
16 अप्रैल को सरकी पयाला पुलिस चेकपोस्ट पर ड्रोन से हमला किया गया था।
इसके बाद TTP के लड़ाकों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी भी की। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हुए।
रिपोर्ट के अनुसार, हंगू में इस साल अब तक करीब 16 ड्रोन हमले हो चुके हैं।
हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है
कि सुरक्षा कर्मियों को अपने बैरकों से बाहर निकलने के दौरान भी अतिरिक्त सुरक्षा का सहारा लेना पड़ रहा है।
चौकियों के ऊपर क्यों लगाए जा रहे हैं जाल?
पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ऊपर लगाए गए मजबूत जाल ड्रोन के प्रोपेलर में फंस सकते हैं
और उसे नीचे गिराने या उसकी गति रोकने में मदद कर सकते हैं।
एक अन्य संभावना यह बताई गई है कि यदि ड्रोन जाल के ऊपर विस्फोट करता है
तो विस्फोट से निकलने वाले कुछ टुकड़ों और मलबे की दिशा बदल सकती है
जिससे जमीन पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को होने वाला नुकसान कम हो सकता है।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि यह तरीका पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।
महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम के मुकाबले सस्ता विकल्प
पाकिस्तान के लिए इन जालों का सबसे बड़ा फायदा उनकी कम कीमत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक चेकपोस्ट को इस तरह के जाल से कवर करने में लगभग 1,400 डॉलर यानी करीब 1.3 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं।
इसके मुकाबले आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम की कीमत हजारों डॉलर से लेकर कई मिलियन डॉलर तक हो सकती है।
इसी वजह से अफगानिस्तान सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा के
कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे जिलों में कई सुरक्षा चौकियों पर इस तरह की नेटिंग की जा रही है।
विशेषज्ञों ने बताया अधूरा सुरक्षा उपाय
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञ इस व्यवस्था को स्थायी समाधान नहीं मान रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक केवल चेकपोस्ट के ऊपर जाल लगाने से ड्रोन खतरा खत्म नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का तर्क है कि आतंकवादी ड्रोन का इस्तेमाल केवल पुलिस चौकियों को निशाना बनाने के लिए नहीं करते।
उनका उद्देश्य महत्वपूर्ण सैन्य या सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना और हमलों के जरिए बड़ा प्रभाव पैदा करना भी हो सकता है।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को ड्रोन के उड़ान भरने के तुरंत बाद उसका पता लगाने
और उसे हवा में ही रोकने वाली आधुनिक तकनीक पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
TTP की ड्रोन क्षमता बनी पाकिस्तान के लिए नई चुनौती
TTP ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया है। संगठन कथित
तौर पर बाजार में आसानी से उपलब्ध कम कीमत वाले व्यावसायिक ड्रोन में बदलाव कर उन्हें हमलों के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
दिसंबर 2025 में TTP द्वारा एक विशेष ड्रोन यूनिट बनाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
इसके बाद संगठन की ड्रोन क्षमता को लेकर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई।
रिपोर्टों के अनुसार, TTP अपने ड्रोन की उड़ान क्षमता बढ़ाने के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध बैटरियों में भी बदलाव कर रहा है।
पाकिस्तान के एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी सवाल
पाकिस्तान पहले से ही चीन और तुर्की से मिलने वाले एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल करता रहा है।
लेकिन हालिया घटनाओं ने इन सुरक्षा व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।
इसी बीच पाकिस्तान द्वारा अमेरिका की एक कंपनी से एंटी-ड्रोन तकनीक हासिल करने की कोशिश की खबरें भी सामने आई हैं।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा बलों के लिए मछली पकड़ने वाले जाल एक अस्थायी सुरक्षा उपाय के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
क्या Fishing Nets रोक पाएंगे ड्रोन हमले?
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, ये जाल कुछ परिस्थितियों में छोटे ड्रोन को रोकने या विस्फोट के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
लेकिन इसे पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था नहीं माना जा सकता।
TTP द्वारा ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को उजागर किया है।
महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम की उपलब्धता और उनकी प्रभावशीलता के बीच अंतर के चलते पाकिस्तान अब कम लागत वाले उपायों का सहारा ले रहा है।
फिलहाल मछली पकड़ने वाले जाल पाकिस्तान के लिए ड्रोन हमलों के खिलाफ एक अस्थायी ‘जुगाड़’ जरूर बन गए हैं
लेकिन लंबे समय में उसे आधुनिक ड्रोन डिटेक्शन और इंटरसेप्शन सिस्टम की जरूरत होगी।
ये भी पढ़े : https://uttarakhandhighlights.com/2026/10/05/uefa-nations-league-portugal-denmark-netherlands-win/
![]()