देहरादून: उत्तराखंड में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत चल रहे ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम की प्रगति को लेकर विभागीय
मंत्री रेखा आर्या ने सचिवालय में समीक्षा बैठक की। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश के
अलग-अलग जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में अब तक आयोजित किए गए कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी विभागीय मंत्री को दी।
विभाग के अनुसार राज्य में संचालित करीब 20 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 13 हजार से अधिक केंद्रों पर ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है।
13 हजार से ज्यादा केंद्रों पर कार्यक्रम आयोजित
अधिकारियों ने बताया कि ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े पात्र लाभार्थियों को केंद्र
और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
सिर्फ योजनाओं की जानकारी देने तक ही कार्यक्रम को सीमित नहीं रखा गया है
बल्कि पात्र लोगों को संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी की जा रही है।
विभाग का उद्देश्य है कि आंगनबाड़ी केंद्र स्थानीय स्तर पर महिलाओं
और बच्चों के लिए सरकारी योजनाओं तक पहुंच का प्रभावी माध्यम बनें।
बैठक में जिलावार प्रगति की जानकारी लेने के साथ यह भी चर्चा हुई
कि जिन क्षेत्रों में कार्यक्रम अभी आयोजित नहीं हो पाए हैं
वहां निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यक्रम पूरे किए जाएं।
7 अक्टूबर तक पूरा करना होगा अभियान
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 7 अक्टूबर ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम की अंतिम तिथि है।
ऐसे में जिन जिलों या आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम अभी बाकी हैं, वहां समय रहते आयोजन पूरा किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि कार्यक्रमों में पात्र लाभार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए
और उन्हें सरकार की संबंधित योजनाओं से जोड़ा जाए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
इसके लिए जिला स्तर पर अधिकारी लगातार निगरानी करें और शेष गतिविधियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।
‘आंगन का मिलन’ को लेकर डिजिटल रिकॉर्ड पर जोर
समीक्षा बैठक में कार्यक्रम की गूगल मैपिंग को लेकर भी निर्देश दिए गए।
मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों से कहा कि सभी आयोजित कार्यक्रमों की मैपिंग शत-प्रतिशत पूरी की जाए।
गूगल मैपिंग के जरिए कार्यक्रम के आयोजन स्थल और उसकी प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इससे विभाग को यह पता लगाने में सुविधा होगी कि किन स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं
और किन केंद्रों पर गतिविधियां अभी बाकी हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड को भविष्य में कार्यक्रमों की निगरानी
और मूल्यांकन के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।
महिलाओं और बच्चों तक योजनाओं की पहुंच पर जोर
रेखा आर्या ने कहा कि ‘आंगन का मिलन’ को केवल एक सामान्य सरकारी कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उनके अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से मातृशक्ति, किशोरियों और छोटे बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से विभाग और लाभार्थियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने में मदद मिलती है।
स्थानीय स्तर पर लोगों की जरूरतों को समझकर उन्हें उपलब्ध योजनाओं की जानकारी देना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए पोषण, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लाभार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
अंतिम व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश
समीक्षा बैठक में मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास होना चाहिए कि पात्र लाभार्थी योजनाओं से जुड़ें और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं में किसी तरह की बाधा न आए।
उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।
मंत्री के अनुसार महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
अधिकारियों को लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
बैठक में अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह, निदेशक बंसीलाल राणा समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।
बैठक के दौरान जिलों में कार्यक्रम की प्रगति, शेष केंद्रों पर आयोजन
पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने और गूगल मैपिंग जैसे विषयों की समीक्षा की गई।
विभाग की ओर से अब उन आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है
जहां अभी तक ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है।
अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी गतिविधियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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