चमोली: बदरीनाथ धाम में बुधवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी के अवसर पर पारंपरिक माता मूर्ति महोत्सव श्रद्धा
और धार्मिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर भगवान बदरी विशाल के प्रतिनिधि माने जाने वाले
भगवान उद्धव जी की डोली माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर पहुंची। यहां माता मूर्ति
और भगवान उद्धव जी के पवित्र मिलन की सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई।
महोत्सव के लिए बदरीनाथ धाम के रावल के नेतृत्व में डिमरी पंचायत के प्रतिनिधि
मंदिर से जुड़े कर्मचारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान उद्धव जी की डोली के साथ माणा गांव पहुंचे।
गांव पहुंचने पर स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ डोली का स्वागत किया।
जौ की हरियाली से हुआ भगवान उद्धव का स्वागत
माणा गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों ने भगवान उद्धव जी को जौ की हरियाली अर्पित की।
इसके बाद धार्मिक जयघोष के बीच डोली को माता मूर्ति मंदिर ले जाया गया।
मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए।
माता मूर्ति मंदिर में पूरे दिन धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं।
श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में हिस्सा लेकर माता मूर्ति और भगवान उद्धव जी के दर्शन किए।
नर-नारायण से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता मूर्ति को भगवान नर और नारायण की माता माना जाता है।
बदरीनाथ क्षेत्र में भगवान नर-नारायण की तपस्या से जुड़ी मान्यताओं के कारण माता मूर्ति महोत्सव का विशेष धार्मिक महत्व है।
इस पर्व को माता और पुत्र के मिलन के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है।
इसी धार्मिक परंपरा के तहत भगवान उद्धव जी की डोली हर वर्ष माता मूर्ति मंदिर पहुंचती है।
महोत्सव के चलते बंद रहे बदरीनाथ मंदिर के कपाट
माता मूर्ति महोत्सव के कारण बदरीनाथ मंदिर के कपाट दिनभर श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे।
महोत्सव से जुड़ी प्रमुख धार्मिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शाम करीब
3 बजे भगवान उद्धव जी की डोली वापस श्री बदरीनाथ मंदिर पहुंची।
डोली के वापस पहुंचने के साथ ही महोत्सव की प्रमुख धार्मिक परंपराएं संपन्न हुईं।
पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए ग्रामीण
माता मूर्ति महोत्सव को लेकर माणा गांव और बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को निभाया।
माता मूर्ति और भगवान उद्धव जी के मिलन की यह परंपरा बदरीनाथ धाम की धार्मिक
आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
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