हिमालयी राज्यों की काउंसिल बनाएगा उत्तराखंड, 13 राज्यों से जुटेंगे वैज्ञानिक आंकड़े

देहरादून: हिमालयी क्षेत्र में बदलते पर्यावरण और पारिस्थितिकी को समझने के लिए उत्तराखंड ने अपनी पहल को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।

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हिमालय दिवस के अवसर पर वैज्ञानिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और विषय से जुड़े जानकारों के साथ हुई चर्चा में हिमालयी राज्यों

की मौजूदा परिस्थितियों और आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया गया। इस दौरान हिमालय से जुड़े विषयों पर

वैज्ञानिक और प्रमाणिक आंकड़े जुटाने की जरूरत पर खास जोर दिया गया।

13 हिमालयी राज्यों के लिए काउंसिल बनाने की पहल

हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों को देखते हुए

उत्तराखंड सरकार ने देश के 13 हिमालयी राज्यों को साथ लाने के लिए एक काउंसिल गठित करने की पहल की है।

इसमें पर्यावरण, पारिस्थितिकी और हिमालय से जुड़े विषयों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

इस काउंसिल का मकसद केवल हिमालय से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करना नहीं है।

इसके जरिए अलग-अलग हिमालयी राज्यों से वास्तविक स्थिति से जुड़े आंकड़े जुटाकर उनका अध्ययन किया जाएगा।

इन जानकारियों के आधार पर हिमालयी क्षेत्र के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।

आपदा से लेकर विकास कार्यों तक जुटेगा डेटा

हिमालय दिवस पर हुई चर्चा में काउंसिल की अब तक की गतिविधियों

और आगे की कार्ययोजना पर भी मंथन किया गया।

योजना के तहत प्रत्येक हिमालयी राज्य से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है।

इसमें प्राकृतिक आपदाएं, पर्यावरणीय बदलाव, विकास परियोजनाएं

और हिमालयी क्षेत्रों में चल रहे विभिन्न कार्य शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करके

यह समझने की कोशिश की जाएगी कि वहां पर्यावरण और पारिस्थितिकी की स्थिति किस तरह बदल रही है।

राज्यों की नीतियों का भी होगा अध्ययन

काउंसिल केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगी।

अलग-अलग राज्यों में पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़ी नीतियों का भी अध्ययन किया जाएगा।

इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हिमालयी राज्यों में बदलती परिस्थितियों से निपटने के लिए

सरकारें किस तरह की योजनाएं और नीतियां लागू कर रही हैं।

अलग-अलग राज्यों के अनुभवों और आंकड़ों को एक साथ रखने के बाद एक व्यापक प्रारूप तैयार किया जाएगा।

इस प्रारूप का इस्तेमाल भविष्य में हिमालयी क्षेत्र से जुड़ी पर्यावरण संरक्षण

आपदा प्रबंधन और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।

विश्वसनीय आंकड़ों पर यूकास्ट का जोर

यूकास्ट के महानिदेशक दुर्गेश पंत के अनुसार हिमालय से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को समझने के लिए सबसे पहले पर्याप्त

और भरोसेमंद डेटा उपलब्ध होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि काउंसिल के गठन के पीछे हिमालयी क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों को गंभीरता से समझने की सोच है।

उन्होंने बताया कि अब इस पहल को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाते हुए

विभिन्न क्षेत्रों से आंकड़े एकत्र करने का काम शुरू किया गया है।

इन आंकड़ों के आधार पर हिमालयी राज्यों की वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

“मौजूदा परिस्थितियों को समझने के लिए सबसे जरूरी है

कि हिमालयी राज्यों से संबंधित विश्वसनीय और पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हों।

इसी को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों से डेटा जुटाने का काम शुरू किया गया है।”

— दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकास्ट

दूसरे हिमालयी राज्यों का दौरा करेंगे काउंसिल के सदस्य

आने वाले समय में काउंसिल से जुड़े सदस्य देश के अन्य हिमालयी राज्यों का दौरा भी करेंगे।

इस दौरान वहां के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों से बातचीत की जाएगी।

फील्ड विजिट के जरिए हिमालयी राज्यों की जमीनी परिस्थितियों को समझने और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा।

हिमालयी क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

हिमालय केवल उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण नहीं है।

यह देश के कई राज्यों की जल व्यवस्था, पर्यावरण और जैव विविधता का अहम आधार है।

ऐसे में हिमालय में होने वाले बदलावों को केवल किसी एक राज्य की समस्या के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।

यदि इन बदलावों का अध्ययन वैज्ञानिक और प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर किया जाता है,

तो भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने, पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।

उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई यह काउंसिल इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों को समझने और भविष्य की रणनीति तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

 

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