Harish Rawat : दल-बदल से आ रही अस्थिरता राज्य के लिए ठीक नहीं, हरदा ने चुनाव से दूरी की बताई वजह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड की राजनीतिक में दल-बदल से आ रही अस्थिरता राज्य के लिए ठीक नहीं है। चुनाव से वक्त दूसरे दलों में तोड़ फोड़ करने की शुरूआत भाजपा ने की है। अब इसे भाजपा ने आधार बना दिया कि दूसरे दलों से तोड़ कर लाओ और अपने कार्यकर्ताओं के सिर पर बैठा तो, चाहे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप क्यों न लगे हो। लेकिन भाजपा में आने के बाद पारस की तरह दिखाई देने लगते हैं।

अमर उजाला डॉट काॅम में पूर्व सीएम हरीश रावत ने उत्तराखंड के वर्तमान राजनीति माहौल, 2027 चुनाव की तैयारियों के साथ 25 वर्षों में हुए विकास के जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर उन्होंने कहा पंचमुखी रुद्राक्ष की तरह पार्टी के पांच नेता गोदियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत व करन माहरा मिलकर पार्टी को निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार कर रहे हैं। उनके साथ मेरी भूमिका सहयोग के रूप में है। पार्टी में यदि टीम तैयार है और दूसरे लोग जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं तो मैंने थोड़ा पीछे हटना उचित समझा चाहिए और भी काम है।

चार महीने दल बदल के प्रहार को झेला
राजनीतिक अवकाश के सवाल पर हरीश रावत ने कहा हम चाहते हैं पार्टी में नेतृत्व साफ तौर पर दिखाई दे। यदि उसमें हरीश रावत बैठा है तो उससे लोगों में एक संशय का संदेश जाएगा। इसलिए मैंने यह बात कही पार्टी में काम करुंगा, लेकिन चुनाव से मुझे अलग रखे तो ज्यादा बेहतर है। राजनीतिक दलों में दल-बदल अस्थिरता का बड़ा कारण बन रहा है।

इससे चुनाव के वक्त राज्य व लोगों के असली मुद्दे दब जाते हैं। तोड़ फोड़ की राजनीति से जनता का कोई लाभ नहीं होता है। मैंने भी चार महीने दल बदल के प्रहार को झेला। सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़ने के बाद सरकार बहाल हुई है। इस अस्थिरता की वजह से उत्तराखंड पहला राज्य हैं, जहां एक वित्तीय वर्ष में दो बार विधानसभा से वित्त विधेयक पारित किया गया। कुछ नए ऊर्जावान युवा राजनीतिक में आते हैं, तो उन्हें पार्टी में लिया जाना चाहिए।

मेरे पास राजनीतिक व क्षेत्रीय अनुभव
राजनीतिक अनुभवों को आने वाली पीढ़ी के लिए संजोए रखना चाहता हूं। मेरे पास राजनीतिक व क्षेत्रीय अनुभव है। मैं चाहता हूं कि उसे लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ी के लिए संजोए रखना चाहता हूं। यह काम सक्रिय राजनीतिक रहकर करना संभव नहीं है। मेरी कोशिश है कि उत्तराखंडियत की सोच को स्वीकार्यता के लिए काम करूं। इसलिए कई बार राजनीतिक से हटने या चुनाव न लड़ने की बात कह देता हूं। 2014 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने कई पहलों की शुरूआत की। राज्य सामाजिक व्यवस्था, रहन-सहन, खानपान को दुनिया में पहचान दिलाने का काम किया। कई पहलों को भाजपा सरकार भी अपनाने जा रही है।

नौजवानों को राजनीतिक में निखरने का अवसर नहीं मिल रहा
पूर्व सीएम रावत ने कहा, हमारे पास बड़े प्रतिभावान नौजवान है। लेकिन हम उन्हें राजनीतिक निखरने का अवसर नहीं दे रहे हैं। विधानसभा सीमित समय में चलती है। इससे अच्छे लोग अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिला रहा है। इससे राज्य को नुकसान हो रहा है। नई प्रतिभाओं को जोड़ने की आवश्यकता है। हमने सामान्य परिवारों को राजनीति में मार्गदर्शन कर आगे बढ़ाया। कांग्रेस में एक या दो नेताओं को छोड़ बाकी मेरे साथ जुड़े रहे। कुछ अंदर व बाहर की राजनीति में खिलाफ हो सकते हैं।

 

मेरे दिमाग में कभी विरासत की बात नहीं आई

रावत ने कहा, मेरे दिमाग में विरासत जैसे कोई बात नहीं है। राजनीतिक में मैंने पुत्र व पुत्री से ज्यादा दूसरे लोगों को तरजीह दी। एक बेटे ने दो बार अपने लिए क्षेत्र तैयार किया। लेकिन मैंने दोनों बार ही वहां दूसरे व्यक्ति को चुनाव लड़ने का मौका दिया। हमने हर क्षेत्र में काम कर समर्थकों को जोड़ा। मैंने जिन लोगों की मदद की है, उनसे जुड़ाव को आगे बढ़ाने के लिए विरासत के रूप में बेटे व बेटी ध्वज वाहक के रूप में दिखाई देते हैं। राजनीतिक में कुछ लोग नाराज रहते हैं कुछ लोग आदर्श मानते हैं। कुछ नौजवानों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा हूं, उसमे मेरा बेटा भी है।

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