चकराता, देहरादून: उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति और लोक रीति-रिवाज देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
यहां की सदियों पुरानी विवाह परंपराएं आज भी ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इसी क्षेत्र में चकराता तहसील के उदावा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है
जिसने पहाड़ी गांवों में सड़क संपर्क की जरूरत को फिर चर्चा में ला दिया है।
शादी के बाद दुल्हन शर्मिला को अपने ससुराल पहुंचने के लिए करीब ढाई घंटे तक पैदल सफर करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, बुल्हाड़ गांव की रहने वाली शर्मिला का विवाह उदावा गांव निवासी अनिल के साथ मंगलवार को संपन्न हुआ।
जौनसार-बावर की पारंपरिक ‘जोजोड़’ विवाह प्रथा के तहत दुल्हन अपने साथ आए लोगों के साथ ससुराल पहुंची।
इस दौरान करीब 8 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ी।
क्या है जौनसार-बावर की जोजोड़ विवाह परंपरा?
जौनसार-बावर उत्तराखंड के देहरादून जिले का एक विशिष्ट जनजातीय क्षेत्र है
जो अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, खानपान और सामाजिक रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है।
यहां प्रचलित ‘जोजोड़’ परंपरा में विवाह के बाद दुल्हन अपने साथ आए लोगों के साथ दूल्हे के घर जाती है।
समय के साथ क्षेत्र में विवाह के तौर-तरीकों में बदलाव भी देखने को मिला है।
कई परिवार अब आधुनिक विवाह पद्धतियां अपना रहे हैं
लेकिन कुछ गांवों में पुरानी परंपराएं आज भी निभाई जाती हैं।
शर्मिला और अनिल का विवाह भी इसी पारंपरिक रीति-रिवाज से संपन्न हुआ।
हालांकि, इस विवाह के दौरान तय की गई पैदल दूरी ने ग्रामीण क्षेत्रों में
बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की ओर ध्यान खींचा है।
ढाई घंटे में तय किया करीब 8 किलोमीटर का सफर
विवाह की खुशियों के बीच शर्मिला और उनके साथ आए
ग्रामीणों को उदावा गांव पहुंचने के लिए लंबा पैदल रास्ता तय करना पड़ा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुल्हन को ससुराल पहुंचने में करीब ढाई घंटे लगे।
पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क की कमी का असर केवल शादी-विवाह तक सीमित नहीं रहता।
ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों, बच्चों की पढ़ाई, जरूरी सामान लाने और बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने में भी परेशानी हो सकती है।
उदावा गांव तक मोटर मार्ग की सुविधा नहीं होने की बात ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है
कि दूरस्थ पहाड़ी बस्तियों को बेहतर आवागमन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को होती है परेशानी
उत्तराखंड के कई दुर्गम इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क निर्माण चुनौतीपूर्ण होता है।
इसके बावजूद ग्रामीणों के लिए मोटर मार्ग का महत्व काफी अधिक है
क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है।
उदावा गांव में विवाह के दौरान सामने आई स्थिति ने सड़क संपर्क की जरूरत को रेखांकित किया है।
स्थानीय स्तर पर मोटर मार्ग की सुविधा मिलने से ग्रामीणों को पैदल दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।
दुल्हन शर्मिला ने CM धामी से की सड़क बनाने की अपील
अपने विवाह के बाद सामने आई इस परेशानी के बीच दुल्हन शर्मिला ने
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
उनकी अपील है कि गांव को मोटर मार्ग से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं
ताकि स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिल सके। सड़क बनने से विवाह समारोहों के
अलावा आपातकालीन परिस्थितियों में भी ग्रामीणों को मदद मिल सकती है।
अब इस मांग पर शासन-प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, सड़क निर्माण की स्वीकृति, बजट या कार्य शुरू होने से संबंधित किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि आवश्यक है।
पहाड़ के गांवों तक सड़क कब पहुंचेगी?
शर्मिला की मांग ने एक बार फिर दूरस्थ पहाड़ी गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती को सामने रखा है।
सड़क संपर्क मजबूत होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान हो सकती है और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
उदावा गांव के ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि उनकी सड़क संबंधी मांग संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेगी
और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। गांव तक मोटर मार्ग कब बनेगा
इसका जवाब आने वाले समय में प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।
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