देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून पुलिस लाइन में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में शहीद पुलिसकर्मियों
और अर्धसैनिक बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को सम्मानित किया
और पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के साथ जवानों के कल्याण के लिए आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी कठिन परिस्थितियों में भी जनता की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम करते हैं।
प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों, आपदाओं और बढ़ते साइबर अपराधों के बीच पुलिस की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं।
ऐसे में पुलिस बल को आधुनिक संसाधन, बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
पुलिस विभाग में करीब 1,600 पदों पर भर्ती की घोषणा
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न इकाइयों में खाली पड़े करीब 1,600 पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की।
इसके साथ ही थानों और चौकियों में कर्मचारियों की जरूरत के अनुसार पदों की संख्या और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।
पुलिसकर्मियों को जांच के दौरान आधुनिक तकनीक का लाभ देने के लिए विवेचकों को आधुनिक जांच किट उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई।
इससे आपराधिक मामलों की जांच को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
थानों का वार्षिक बजट 4 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये
पुलिस थानों के कामकाज और आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने वार्षिक बजट दोगुना करने की घोषणा की।
इसके तहत थानों का बजट 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य पुलिस थानों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना
और दैनिक कार्यों के संचालन में आने वाली परेशानियों को कम करना है।

मुख्यमंत्री की आठ प्रमुख घोषणाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस विभाग के सुदृढ़ीकरण और कर्मचारियों के कल्याण के लिए निम्नलिखित घोषणाएं कीं:
- भर्ती प्रक्रिया: उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न इकाइयों में करीब 1,600 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करना।
- थानों और चौकियों की समीक्षा: कार्मिकों की आवश्यकता के अनुसार पदों और व्यवस्थाओं का पुनर्मूल्यांकन करना।
- आधुनिक जांच किट: विवेचकों को आधुनिक जांच उपकरण उपलब्ध कराना।
- थानों का बजट: वार्षिक बजट 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये करना।
- पुलिस मॉडर्न स्कूल: प्रदेश के सभी पुलिस मॉडर्न स्कूलों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं में सुधार करना।
- आवासीय सुविधाएं: देहरादून में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल और बहुमंजिला बैरक का निर्माण कराना।
- पुलिस अस्पताल: देहरादून स्थित पुलिस अस्पताल का उच्चीकरण करना।
- कर्मचारियों का कल्याण: पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए बेहतर सुविधाओं तथा कल्याणकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करना।
पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शहीदों को किया याद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में देशभर में 154 जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए।
इनमें उत्तराखंड पुलिस के उपनिरीक्षक स्वर्गीय विनोद कुमार भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद जवानों का त्याग पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक भी जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान की याद दिलाता है।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के अनुसार, राज्य गठन से अब तक
उत्तराखंड पुलिस के 206 कार्मिक कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो चुके हैं।

नशे और साइबर अपराध पर सख्ती की तैयारी
मुख्यमंत्री ने नशे के कारोबार और साइबर अपराध को पुलिस के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में शामिल बताया।
उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है
और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
साइबर अपराधों से निपटने के लिए करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट साइबर क्राइम
कोऑर्डिनेशन सेंटर का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों को
आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।
महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में उन्होंने बताया कि प्रत्येक थाने में
महिला हेल्प डेस्क के अंतर्गत क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की गई है।
चारधाम और कांवड़ यात्रा में पुलिस की भूमिका की सराहना
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान लगभग 5 करोड़ यात्रियों और चारधाम यात्रा में अब तक
60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की सुरक्षित तथा सुगम यात्रा सुनिश्चित करने में पुलिस के योगदान की प्रशंसा की।
उन्होंने बताया कि उत्कृष्ट सेवाओं के लिए इस वर्ष 319 पुलिसकर्मियों को विभिन्न पदकों और सम्मान चिह्नों से सम्मानित किया गया है।
उत्तराखंड पुलिस का प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर्स’ के लिए नामित होना भी प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
पुलिसकर्मियों के आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री के अनुसार, पुलिस आवास संतुष्टि दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है।
सरकार का लक्ष्य इसे 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इस वर्ष 785 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी गई।
इसके अलावा नागरिक पुलिस में 1,573 और पीएसी में 370 आरक्षियों की सीधी भर्ती की गई।
उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर और अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के 222 पदों की भर्ती प्रक्रिया भी पूरी की गई है। मृतक पुलिसकर्मियों के 24 आश्रितों को नियुक्तियां देने की जानकारी दी गई।
सरकार की ओर से थानों, अग्निशमन केंद्रों, बैरकों, मैस और अन्य कार्यस्थलों के लिए
इस वित्तीय वर्ष में 58 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी किए जाने की जानकारी भी दी गई।
पुलिसकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उनके तनाव प्रबंधन के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
शहीद परिवारों और पुलिसकर्मियों के लिए आर्थिक सहायता
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने बताया कि इस वर्ष पुलिस शहीद कोष से आश्रित परिवारों को लगभग 50 लाख रुपये की सहायता दी गई है।
पुलिस सैलरी पैकेज के अंतर्गत अब तक करीब 31 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि जीवन रक्षक निधि से 25 पुलिसकर्मियों को 1 करोड़ 16 लाख रुपये की सहायता दी गई
जबकि 446 मेधावी बच्चों को 34 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
एम्स ऋषिकेश में चौबीसों घंटे संचालित पुलिस हेल्प डेस्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री खजान दास
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सविता कपूर, जिला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर कौर, ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी, सचिव गृह शैलेश बगोली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ
पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
पुलिस बल को बेहतर सुविधाएं और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने से प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
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