हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में जंगली हाथियों के आबादी वाले क्षेत्रों और खेतों में पहुंचने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए
वन विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत छह जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, हाथियों की पहचान करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए जरूरी मंजूरियां भी मिल गई हैं।
इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त टीम बनाई गई है
जिसकी अध्यक्षता वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान करेंगे।
हरिद्वार वन प्रभाग की रसियाबड़ यूनिट में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)
और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं।
वन विभाग को रेडियो कॉलर उपलब्ध हो चुके हैं और अब इन्हें चिह्नित हाथियों पर लगाने की तैयारी है।
आबादी और खेतों तक पहुंच रहे हाथी, किसानों की बढ़ी परेशानी
हरिद्वार के मिस्सरपुर, जगजीतपुर, जमालपुर और बिल्केश्वर सहित कई इलाकों में जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
वन विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में 20 से अधिक हाथियों की गतिविधियां देखी जाती हैं।
जंगल से निकलकर हाथी कई बार खेतों और रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं।
इनकी आवाजाही से किसानों को फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ता है।
गन्ने और धान के खेतों में घुसने वाले हाथी फसलों को रौंद देते हैं।
इसके अलावा, हाथियों के हमलों में लोगों की जान जाने की घटनाओं ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी समस्या को देखते हुए वन विभाग ने झुंड के साथ चलने वाले
और नेतृत्व करने वाले छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने के लिए चिह्नित करने की योजना बनाई है।
रेडियो कॉलर से मिलेगी हाथियों की लोकेशन की जानकारी
रेडियो कॉलर लगने के बाद वन विभाग को संबंधित हाथियों की स्थिति और उनकी आवाजाही के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हाथी किस दिशा में बढ़ रहे हैं और उनके आबादी के नजदीक पहुंचने की आशंका कब है।
समय रहते सूचना मिलने पर वनकर्मियों को संबंधित क्षेत्र में सतर्क किया जा सकेगा।
इससे ग्रामीणों को सावधान करने, हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने
और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
श्यामपुर और लालढांग में हाथियों की आवाजाही से ग्रामीण चिंतित
हरिद्वार के श्यामपुर, लालढांग और जंगल से सटे गांवों में हाथियों की मौजूदगी स्थानीय लोगों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है।
भोजन की तलाश में हाथी खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे किसानों की मेहनत और फसल दोनों को नुकसान होता है।
जंगल के आसपास आबादी का विस्तार और हाथियों के पारंपरिक गलियारों में मानवीय गतिविधियों का बढ़ना भी संघर्ष की आशंका को बढ़ाता है।
हाल के दिनों में श्यामपुर रेंज के सजनपुर क्षेत्र में खेत में काम कर रहे एक किसान की हाथी के हमले में मौत हो गई थी।
इसके बाद श्यामपुर में हाईवे पर एक हाथी ने एक कार पर हमला कर दिया था।
इस घटना में कार सवार की जान बाल-बाल बची।
लालढांग क्षेत्र के ग्रामीण भी हाथियों की आवाजाही को लेकर चिंतित रहते हैं।
खाई और सोलर फेंसिंग से भी होगी रोकथाम
हाथियों की निगरानी के साथ-साथ उन्हें आबादी की ओर आने से रोकने के लिए वन विभाग संवेदनशील इलाकों में अन्य उपाय भी कर रहा है।
इनमें हाथी रोकने के लिए खाई खोदना और सोलर फेंसिंग लगाना शामिल है।
जानकारी के अनुसार, कुंभ मेले के बजट से हाथी सुरक्षा के लिए खाई बनाने का काम भी किया जा रहा है।
रेडियो कॉलर से प्राप्त जानकारी के आधार पर वनकर्मी हाथियों की गतिविधियों का आकलन कर सकेंगे
और जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा सकेंगे।
हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के अनुसार, छह हाथियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है।
आवश्यक अनुमतियां मिलने के बाद विशेष टीम आगे की कार्रवाई कर रही है।
रेडियो कॉलर लगाने का उद्देश्य हाथियों की गतिविधियों पर बेहतर नजर रखना
और इंसानों व वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका को कम करना है।
यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, यह कॉलर लगाए जाने के बाद मिलने वाले आंकड़ों
और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल, इस पहल से
हरिद्वार के उन इलाकों में निगरानी बेहतर होने की उम्मीद है
जहां हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों और किसानों को परेशानी होती है।
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