नागनाथ पोखरी छात्रसंघ चुनाव में ABVP हारी, आर्यन ग्रुप जीता

चमोली: उत्तराखंड के महाविद्यालयों में 29 सितंबर को हुए छात्रसंघ चुनाव के परिणाम देर शाम घोषित किए गए।

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चमोली जिले के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में आर्यन छात्र संगठन ने कई प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की।

यहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रत्याशियों को विभिन्न पदों पर हार का सामना करना पड़ा।

नागनाथ पोखरी क्षेत्र को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का गृह क्षेत्र बताया जाता है।

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद इस महाविद्यालय का नतीजा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

अध्यक्ष पद पर राहुल सिंह की जीत

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में अध्यक्ष पद के चुनाव में आर्यन ग्रुप के राहुल सिंह ने ABVP के शिवम पंत को 38 मतों से हराया।

राहुल सिंह को कुल 176 वोट मिले, जबकि शिवम पंत के खाते में 138 मत आए।

उपाध्यक्ष पद पर भी आर्यन ग्रुप का कब्जा

उपाध्यक्ष पद पर आर्यन ग्रुप की दिव्या ने ABVP की रितिका को 74 मतों के अंतर से पराजित किया।

दिव्या को 186 मत, जबकि रितिका को 112 वोट मिले। चुनाव में 7 मत NOTA और 14 मत अवैध पाए गए।

विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद का परिणाम

विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद पर भी आर्यन ग्रुप के प्रत्याशी प्रियांशु नेगी विजयी रहे। उन्हें 181 मत मिले।

वहीं, ABVP के अखिल सिंह को 125 वोट प्राप्त हुए।

सचिव पद पर 37 वोट से जीत

सचिव पद पर आर्यन ग्रुप के सूरज सिंह ने ABVP की कोमल सिंह को 37 मतों से हराया।

सूरज सिंह के पक्ष में 170 मत पड़े, जबकि कोमल सिंह को 133 वोट मिले।

सह सचिव और कोषाध्यक्ष पद भी आर्यन ग्रुप के नाम

सह सचिव पद पर आर्यन ग्रुप की रोनिका ने जीत दर्ज की। उन्हें 182 मत मिले, जबकि ABVP की हिमांशी को 112 वोट मिले।

वहीं, कोषाध्यक्ष पद पर आर्यन ग्रुप की प्रियांशी ने ABVP की महक को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। प्रियांशी को 182, जबकि महक को 110 मत मिले।

नागनाथ पोखरी के परिणाम पर चर्चा

नागनाथ पोखरी में छात्रसंघ चुनाव के दौरान अध्यक्ष समेत प्रमुख पदों पर आर्यन ग्रुप के प्रत्याशियों की जीत हुई

जबकि ABVP के प्रत्याशी इन पदों पर जीत दर्ज नहीं कर सके।

चूंकि नागनाथ पोखरी क्षेत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का गृह क्षेत्र है

इसलिए यहां छात्रसंघ चुनाव के परिणामों को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है।

हालांकि, छात्रसंघ चुनाव के परिणामों को व्यापक राजनीतिक जनादेश के रूप में देखना अलग विषय है

और इस चुनाव का दायरा महाविद्यालय स्तर तक सीमित है।

 

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