जहरीले सांप के डंसने से गंभीर रूप से बीमार हुई 12 वर्षीय बालिका को नया जीवन मिला है। सर्पदंश के बाद पूरे शरीर में जहर फैलने से बच्ची की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी। उसे डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएग्यूलेशन (डीआईसी) जैसी गंभीर अवस्था हो गई थी, जिसमें शरीर की रक्त के थक्के बनने की प्रणाली प्रभावित हो जाती है और अनियंत्रित रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता, लगातार निगरानी और समय पर दिए गए उपचार से बालिका को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकिता गिरी ने बताया कि बच्ची को बचाने के लिए 40 एंटी स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन, 17 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) और चार यूनिट क्रायोप्रेसिपिटेट चढ़ाए गए। यह उपचार ब्लड सेंटर के सहयोग से संभव हो पाया। समय पर इतनी बड़ी मात्रा में रक्त अवयव उपलब्ध होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों से बच्च्ची की जान बचाई जा सकी।
इस दौरान जिस हाथ पर सांप ने काटा था, वहां तेजी से सूजन बढ़ गई थी। स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मण यादव ने प्रभावित हिस्से पर आवश्यक शल्य प्रक्रिया (चीरा) की, जिससे सूजन कम हुई और मरीज को काफी राहत मिली। 12 दिनों तक चले उपचार, गहन निगरानी और चिकित्सकीय प्रयासों के बाद बालिका की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।