Uttarakhand : 50 से अधिक गांव अब भी ग्रिड बिजली से दूर, वन कानून बने बड़ी चुनौती

देहरादून: उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और वन क्षेत्रों से जुड़े कानूनी प्रावधान आज भी कई विकास परियोजनाओं के सामने बड़ी बाधा बने हुए हैं। खासकर सीमावर्ती और घने वन क्षेत्रों में बसे गांवों तक सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

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प्रदेश में आज भी 50 से अधिक गांव ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां तक ग्रिड आधारित बिजली की आपूर्ति नहीं पहुंच सकी है। इन गांवों तक बिजली लाइन पहुंचाने के प्रयास किए गए, लेकिन वन भूमि और रिजर्व फॉरेस्ट से जुड़े नियमों और अनुमति प्रक्रियाओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया।

UPCL के MD का पैतृक गांव भी ग्रिड बिजली से वंचित

दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी का पैतृक गांव भी अब तक ग्रिड बिजली से नहीं जुड़ पाया है।

पौड़ी गढ़वाल जिले के रिखणीखाल ब्लॉक में स्थित तैड़िया गांव रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र से घिरा हुआ है। वन क्षेत्र होने के कारण यहां बिजली की लाइन बिछाने में कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं।

पीसी ध्यानी के अनुसार, ऊर्जा निगम प्रदेश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वन विभाग से जुड़े नियमों और आवश्यक अनुमतियों के कारण कई क्षेत्रों में बिजली लाइन पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।

अंडरग्राउंड लाइन भी हो सकती है विकल्प

ऊर्जा निगम ऐसे दुर्गम गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए वैकल्पिक तरीकों पर भी विचार कर रहा है। इनमें भूमिगत बिजली केबल बिछाने जैसे विकल्प शामिल हैं। हालांकि इन योजनाओं को लागू करने के लिए भी संबंधित वन विभाग की मंजूरी आवश्यक होगी।

सौर ऊर्जा से चल रही व्यवस्था

ग्रिड बिजली से वंचित गांवों को पूरी तरह अंधेरे में नहीं छोड़ा गया है। कई इलाकों में बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था की गई है।

लेकिन पहाड़ी और वन क्षेत्रों में खराब मौसम के दौरान सौर ऊर्जा उत्पादन प्रभावित होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लगातार बादल रहने या पर्याप्त धूप नहीं मिलने की स्थिति में बिजली आपूर्ति सीमित हो सकती है।

प्रदेश के इन दुर्गम गांवों तक स्थायी और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में वन संरक्षण और स्थानीय लोगों की बुनियादी जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर समाधान निकालने की जरूरत महसूस की जा रही है।

 

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