देहरादून: उत्तराखंड के बर्फ से ढके और दुर्गम क्षेत्रों में जनगणना का विशेष अभियान आज, 1 सितंबर से शुरू हो रहा है। जनगणना के दूसरे चरण के तहत प्रशिक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर पहुंचकर लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे। इस अभियान के लिए जनगणना कार्य निदेशालय ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
राज्य के चार हिमाच्छादित जिलों—चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़—में यह विशेष जनगणना अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दायरे में कुल 131 गांव और तीन प्रमुख शहरी स्थानीय निकाय बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री शामिल हैं।
182 प्रगणक और पर्यवेक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना कार्य के लिए कुल 182 अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें 139 प्रगणक और 43 पर्यवेक्षक शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को जनगणना की प्रक्रिया, डिजिटल माध्यम से जानकारी दर्ज करने, प्रगणना क्षेत्रों की पहचान और आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई।
चार जिलों के इन क्षेत्रों में होगी जनगणना
जनगणना अभियान के तहत चमोली जिले के 23 गांवों के साथ बदरीनाथ नगर पंचायत को शामिल किया गया है। रुद्रप्रयाग जिले के चार गांवों और केदारनाथ नगर पंचायत में भी गणना की जाएगी।
वहीं उत्तरकाशी जिले के सबसे अधिक 69 हिमाच्छादित गांवों और गंगोत्री नगर पंचायत को अभियान में शामिल किया गया है। पिथौरागढ़ जिले के 35 गांवों में भी जनगणना का कार्य किया जाएगा।
स्व-गणना में केवल 338 लोगों ने किया पंजीकरण
17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया था। इस दौरान हिमाच्छादित क्षेत्रों की अनुमानित करीब 55 हजार आबादी में से केवल 338 नागरिकों ने स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कराई।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार उत्तरकाशी में सबसे अधिक 277 लोगों ने स्व-गणना की। इसके अलावा चमोली में 29, पिथौरागढ़ में 24 और रुद्रप्रयाग में 8 नागरिकों ने इस सुविधा का उपयोग किया।
स्व-गणना करने वालों को सिर्फ देना होगा नंबर
जिन लोगों ने पहले ही Self-Enumeration के माध्यम से अपनी जनगणना पूरी कर ली है, उन्हें प्रगणक के घर पहुंचने पर केवल अपना स्व-गणना नंबर देना होगा। प्रगणक इस नंबर को अपने मोबाइल ऐप में दर्ज करेगा, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति की जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो जाएगी।
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, हिमाच्छादित क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करना बेहद जरूरी है। इसके लिए राज्य सरकार और संबंधित जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
OTP को लेकर जरूरी चेतावनी
जनगणना निदेशालय ने नागरिकों को साइबर ठगी से सतर्क रहने की सलाह भी दी है। जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी व्यक्ति से OTP नहीं मांगा जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि वे अपना OTP या बैंकिंग और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
जनगणना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क कर सकते हैं। निदेशालय ने लोगों से अधिकृत प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को सहयोग देने की अपील की है, ताकि हर परिवार और व्यक्ति की सही एवं पूरी गणना सुनिश्चित की जा सके।
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