पिथौरागढ़: मानसून के दौरान पहाड़ी इलाकों में उगने वाले जंगली मशरूम का सेवन लोगों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले में जंगली मशरूम की सब्जी खाने के बाद एक 69 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। घटना के बाद एक बार फिर लोगों से जंगली मशरूम का सेवन नहीं करने की अपील की गई है।
खितोली छेड़ा निवासी धरम सिंह अपने खेत से जंगली मशरूम लेकर आए थे। उन्होंने मशरूम की सब्जी बनाकर रात में भोजन किया और सो गए। तड़के करीब तीन बजे उनके पेट में अचानक तेज दर्द और परेशानी शुरू हो गई। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां ईएमओ डॉ. अब्दुल ने उपचार शुरू किया। हालांकि इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. डीपी सिंह के अनुसार, शुरुआती तौर पर मौत का कारण जंगली मशरूम का सेवन माना जा रहा है। परिवार के अन्य सदस्यों ने मशरूम की सब्जी नहीं खाई थी, इसलिए वे सुरक्षित रहे।
जंगली मशरूम खाने से हो सकते हैं गंभीर लक्षण
चिकित्सकों के मुताबिक जहरीले जंगली मशरूम के सेवन के बाद पेट में तेज दर्द और मरोड़, उल्टी, चक्कर, शरीर में पानी की कमी, भ्रम की स्थिति, त्वचा या आंखों का पीला पड़ना और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर समय गंवाए बिना अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि मशरूम खाने के बाद तबीयत बिगड़ने पर बचा हुआ मशरूम या उसकी तस्वीर चिकित्सक को दिखाई जाए। बिना चिकित्सकीय सलाह के उल्टी रोकने वाली दवा लेने से भी बचना चाहिए।
पिथौरागढ़ में पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
पिथौरागढ़ में जंगली मशरूम के सेवन से बीमार होने और मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले महीने 19 जुलाई को जम्कू में एक ही परिवार के पांच लोग जंगली मशरूम खाने के बाद बीमार पड़ गए थे। उन्हें पहले सीएचसी धारचूला ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के बाद पांचों की जान बच गई।
वहीं पिछले साल चंडाक स्थित निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले एक मजदूर, उसकी पत्नी और दो बच्चों की भी जंगली मशरूम खाने के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज के बाद वे स्वस्थ हुए।
कई सालों में सामने आईं मौत की घटनाएं
जिले में बीते वर्षों के दौरान जंगली मशरूम के सेवन से मौत के कई मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2016 में देवलथल तहसील के बमडोली गांव में दो बच्चों, 2017 में धारचूला के बालिंग गांव में एक नेपाली मजदूर और 2018 में गणाई गंगोली के पोखरी गांव में एक ग्रामीण की मौत की जानकारी सामने आई थी। वर्ष 2025 में मुनस्यारी के धापा गांव में जंगली मशरूम खाने के बाद कुंती देवी और उनकी नातिन दीया की भी मौत हुई थी।
मानसून के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में अलग-अलग प्रजातियों के जंगली मशरूम तेजी से उगते हैं। इनमें कौन सा मशरूम खाने योग्य है और कौन सा जहरीला, इसकी पहचान आम लोगों के लिए मुश्किल हो सकती है। इसलिए चिकित्सकों ने लोगों से जंगली मशरूम का सेवन पूरी तरह से न करने की अपील की है।
