हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चले कांवड़ मेले के दौरान रेलवे को जहां करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार हुआ, वहीं परिवहन निगम और औद्योगिक क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हाईवे पर डाक कांवड़ियों का दबाव बढ़ने और भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने से रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित रहा। दूसरी ओर, कच्चा माल न पहुंचने और तैयार माल की डिलीवरी रुकने से हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 800 करोड़ रुपये का टर्नओवर प्रभावित हुआ।
चार लाख यात्री ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे
कांवड़ मेले के दौरान रेलवे ने यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त तैयारियां की थीं। इस दौरान करीब चार लाख यात्री ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे, जबकि करीब दो लाख यात्री हरिद्वार से ट्रेन के जरिए अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए तीन अतिरिक्त टिकट काउंटर खोले और तीन कांवड़ मेला स्पेशल ट्रेनें भी संचालित कीं। इसके चलते 13 दिनों में हरिद्वार रेलवे स्टेशन से रेलवे को करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार हुआ।
स्टेशन अधीक्षक दिनेश झा ने बताया कि कांवड़ मेले को लेकर मंडल स्तर से पहले ही तैयारियां कर ली गई थीं। मेला अवधि में करीब छह लाख यात्रियों ने ट्रेनों के जरिए आवाजाही की।
आखिरी पांच दिन रोडवेज को रोजाना 8 लाख का नुकसान
कांवड़ियों का दबाव बढ़ने के बाद पुलिस-प्रशासन ने हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी। इसका सीधा असर रोडवेज बसों के संचालन पर पड़ा। बसें न तो शहर में प्रवेश कर सकीं और न ही शहर से बाहर निकल सकीं।
मेले के अंतिम दिन मुख्य बस स्टैंड को भी बंद करना पड़ा। इसके अलावा बारिश, जलभराव और कीचड़ के कारण भी बसों का संचालन प्रभावित हुआ। नतीजतन उत्तराखंड रोडवेज को कांवड़ मेले के अंतिम पांच दिनों में प्रतिदिन करीब आठ लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
हरिद्वार रोडवेज डिपो से सामान्य दिनों में करीब 80 बसों का संचालन होता है और निगम की रोजाना आय करीब 25 लाख रुपये तक रहती है। यात्रियों की सुविधा के लिए तीन अस्थायी बस स्टैंड बनाए गए थे, लेकिन हाईवे और शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बसों का संचालन सामान्य नहीं हो सका।
रोडवेज के महाप्रबंधक विशाल चंद्रा ने कहा कि कांवड़ मेले से मिले अनुभवों के आधार पर आगामी कुंभ मेले की तैयारियों को और बेहतर किया जाएगा।
उद्योगों का 800 करोड़ रुपये का टर्नओवर प्रभावित
कांवड़ मेले के दौरान हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने का असर हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ा। सिडकुल, बहादराबाद, भगवानपुर और ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में कच्चा माल नहीं पहुंच सका और तैयार माल की डिलीवरी भी प्रभावित रही।
सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन हरिद्वार के अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग के मुताबिक, कांवड़ मेले के दौरान जिले के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 800 करोड़ रुपये का टर्नओवर प्रभावित हुआ। ट्रांसपोर्ट बंद रहने के साथ ही वर्करों की आवाजाही भी प्रभावित रही।
उन्होंने कहा कि यदि ग्रीन कॉरिडोर और सिडकुल से बिहारीगढ़ वाली सड़क को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जोड़ दिया जाए तो कांवड़ और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान उद्योगों को होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रेलवे को फायदा, बाकी विभागों पर पड़ा दबाव
कांवड़ मेले के आंकड़े बताते हैं कि जहां रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों और बेहतर प्रबंधन के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार किया, वहीं हाईवे बंद होने से रोडवेज और औद्योगिक क्षेत्र को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे में आगामी कुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार में ट्रैफिक मैनेजमेंट, वैकल्पिक मार्ग और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था अहम मानी जा रही है।
