देहरादून: हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है। मामले को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध और संसद में मुद्दा उठने के बाद अब उत्तराखंड कांग्रेस ने राज्यपाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है।
24 अगस्त को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि राज्य सरकार को मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
मंच के कथित शुद्धिकरण पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद कुछ भाजपा नेताओं की ओर से रामलीला मैदान के मंच का कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया। कांग्रेस ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संविधान की भावना और सामाजिक समानता के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
पार्टी के चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि मामले पर सरकार की कथित चुप्पी सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने राज्यपाल से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस ने यह भी मांग रखी कि घटना में शामिल लोगों की पहचान कर भारतीय न्याय संहिता और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। पार्टी का कहना है कि भविष्य में जातिगत भेदभाव या सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देने वाली घटनाओं को रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
संसद में भी उठ चुका है मामला
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इस विवाद को संसद में भी उठाया गया था। पार्टी का दावा है कि उस दौरान सदन के नेता जेपी नड्डा की ओर से मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।
हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अभी तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसी को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से हस्तक्षेप करने और राज्य सरकार को जल्द कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पूरे उत्तराखंड में आंदोलन शुरू करेगी।
अब इस मामले में राज्यपाल और राज्य सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।
