हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर जनरल टिकट को एसी कोच के टिकट में बदलवाने
का लालच देकर दो मजदूरों से ठगी करने वाले पांच आरोपियों को जीआरपी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
आरोपियों ने खुद को रेलवे कर्मचारियों का रिश्तेदार बताकर यात्रियों को भरोसे में लिया और उनके मोबाइल
नकदी व अन्य सामान हासिल कर लिए। इसके बाद पीड़ितों के बैंक खातों से भी रकम निकाल ली गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी और मुखबिर तंत्र की मदद ली गई।
घटना के करीब 30 घंटे के भीतर पांचों आरोपियों को रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से पकड़ लिया गया।
मजदूरों को एसी टिकट दिलाने का दिया झांसा
पुलिस के अनुसार, 10 अक्टूबर की रात पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के निवासी बिस्वजीत सौरेन
और रंजीत कोरा घर जाने के लिए हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दोनों यहां दिहाड़ी मजदूरी करते थे
और दशहरा व दीपावली पर परिवार के साथ समय बिताने के लिए आसनसोल जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले थे।
दोनों ने जनरल श्रेणी के टिकट खरीदे थे। ट्रेन का इंतजार करते समय उनकी मुलाकात दो युवकों से हुई।
बातचीत के दौरान युवकों ने दावा किया कि उनके मामा रेलवे में टीटी हैं और वे जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच के टिकट में बदलवा सकते हैं।
आरोपियों ने मजदूरों से उनकी भाषा में बातचीत कर विश्वास हासिल किया।
इसके बाद उन्हें अपने एक अन्य साथी से मिलवाया
जिसने रेलवे कर्मचारी की तरह बात करके उनकी योजना को आगे बढ़ाया।
रेलवे नियमों का बहाना बनाकर लिया सामान
आरोपियों ने मजदूरों से कहा कि एसी कोच में सफर करने के लिए उनका सामान, मोबाइल
और नकदी कुछ समय के लिए जमा करना होगा। उन्होंने सामान की रसीद देने
और यात्रा के गंतव्य पर सब कुछ वापस लौटाने का भरोसा भी दिलाया।
उनकी बातों में आकर दोनों मजदूरों ने लगभग 12 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन, बैग
और कपड़े आरोपियों को सौंप दिए। इसके बाद वे बताए गए स्थान पर बैठकर रसीद मिलने का इंतजार करते रहे
लेकिन आरोपी सामान लेकर वहां से निकल गए।
अगले दिन बैंक खातों की जानकारी लेने पर मजदूरों को पता चला
कि उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाले जा चुके हैं।
ठगी का एहसास होने पर दोनों ने जीआरपी हरिद्वार में शिकायत दर्ज कराई।
पांच आरोपियों ने मिलकर तैयार की थी योजना
जीआरपी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाएं निभाते थे।
पहले दो आरोपी स्टेशन पर यात्रियों से दोस्ताना बातचीत कर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे।
इसके बाद एक अन्य साथी को रेलवे कर्मचारी का रिश्तेदार बताकर पेश किया जाता था।
गिरोह के सदस्य एसी कोच में यात्रा करने के कथित नियम समझाने का नाटक करते
और सामान जमा कराने के बहाने यात्रियों की नकदी व मोबाइल अपने कब्जे में ले लेते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने मोबाइल का पिन हासिल कर बैंक खातों से रकम निकालने की वारदात को भी अंजाम दिया।
नकदी, मोबाइल और बैग बरामद
एसपी जीआरपी अरुणा भारती ने बताया कि गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी बिहार के रहने वाले हैं
और उनकी उम्र 19 से 24 वर्ष के बीच है। पुलिस ने उनके कब्जे से पीड़ितों के 25 हजार रुपये नकद, वनप्लस मोबाइल फोन और बैग बरामद किया है।
इसके अलावा बैंक खाते से निकाली गई रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ, सुमित कुमार, किशन कुमार, जितेंद्र कुमार चौधरी
और बंटी कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वे बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी वारदात के बाद बिहार जाने वाली ट्रेन से फरार होने की कोशिश कर रहे थे।
इसी दौरान उन्हें रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया गया।
सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर दिया गया है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
महंगे शौक के लिए करते थे ठगी
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि आरोपी महंगे मोबाइल फोन, बाइक और कपड़े खरीदने के लिए जल्दी पैसा कमाना चाहते थे।
गिरोह के कुछ सदस्य पहले मजदूरी, ऑटो चलाने, सब्जी बेचने और राजमिस्त्री जैसे काम करते थे।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इससे पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।
एसपी जीआरपी अरुणा भारती के मुताबिक, पीड़ितों की रकम वापस दिलाने के लिए फ्रीज कराई गई राशि को उनके बैंक खातों में लौटाने का प्रयास किया जा रहा है।
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस ने यात्रियों से अपील की है
कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना मोबाइल, बैंक संबंधी जानकारी, पिन या नकदी उसके हवाले न करें।
रेलवे टिकट में बदलाव या कोच से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए केवल अधिकृत रेलवे कर्मचारी
और आधिकारिक टिकटिंग माध्यमों पर भरोसा करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत रेलवे पुलिस को दें।
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