हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने रानीपुर मोड़ स्थित
एक प्रसिद्ध मिठाई प्रतिष्ठान पर जांच अभियान चलाया। इस दौरान कारोबारी के बिलों, स्टॉक और इनपुट टैक्स क्रेडिट
(ITC) से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। शुरुआती जांच में करीब 30 लाख रुपये से संबंधित आंकड़ों में विसंगतियां सामने आई हैं।
विभाग ने जरूरी दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल टैक्स चोरी की पुष्टि नहीं हुई है।
विभाग की जांच पूरी होने और रिकॉर्ड का मिलान किए जाने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई जांच
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में राज्य में GST चोरी के मामलों पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर विभाग की टीम ने हरिद्वार के रानीपुर मोड़ स्थित मिठाई प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया।
इस कार्रवाई में विशेष अनुसंधान शाखा, सचल दल और ऑडिट इकाई के अधिकारी शामिल रहे।
टीम ने प्रतिष्ठान के बिल, कारोबारी अभिलेख और कर से संबंधित दस्तावेजों की जांच की।
जांच के दौरान कुछ रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर संबंधित दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त कर लिया गया।
ITC के रिकॉर्ड में क्या मिली गड़बड़ी?
उपायुक्त GST देहरादून सुरेश कुमार के अनुसार, शुरुआती पड़ताल में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के आंकड़ों का सही मिलान नहीं हो पाया।
विभाग यह जांच कर रहा है कि कारोबारी रिकॉर्ड में दर्ज ITC और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर क्यों है।
ITC वह टैक्स क्रेडिट है, जिसका लाभ कारोबारी नियमों के तहत खरीद पर चुकाए गए GST के आधार पर ले सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रतिष्ठान के मामले में यह भी देखा जा रहा है
कि नियमानुसार जितना ITC रिवर्स किया जाना चाहिए था, उतना किया गया या नहीं।
पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर करीब 30 लाख रुपये की विसंगति का आकलन किया गया है।
हालांकि, इसे फिलहाल प्रमाणित टैक्स चोरी नहीं माना गया है।
प्रतिष्ठान को नोटिस, जवाब के बाद होगा अंतिम आकलन
विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठान को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अधिकारियों के अनुसार, कारोबारी पक्ष से रिकॉर्ड उपलब्ध होने
और विभागीय आंकड़ों का मिलान होने के बाद टैक्स देनदारी का सही आकलन किया जाएगा।
प्रतिष्ठान के स्वामी ने टीम को बताया कि रिकॉर्ड डाउनलोड करने के बाद ही
वह आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा पाएंगे।
इसके बाद कारोबारी के पोर्टल पर मौजूद विवरण और विभाग के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
यदि जांच में ITC का अनुचित लाभ लेने की पुष्टि होती है
तो नियमानुसार संबंधित राशि वापस जमा कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने बताया नियमित जांच अभियान
उपायुक्त सुरेश कुमार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले में टैक्स चोरी की पुष्टि नहीं हुई है।
उनके अनुसार, राज्य में राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने
और कर संबंधी अनियमितताओं की पहचान के लिए नियमित जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।
अब इस मामले में विभाग की आगे की जांच और कारोबारी की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।
अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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