Dehradun News: उत्तराखंड में वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों के दौरान
सड़क दुर्घटनाओं में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सोमवार को देहरादून में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की समीक्षा बैठक में पेश किए गए
आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई। बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने की।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 तक राज्य में कुल 1,480 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं।
पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,289 था। यानी एक साल में हादसों की संख्या में करीब 14.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सड़क हादसों में घायलों की संख्या भी बढ़ी
दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
2025 के पहले आठ महीनों में जहां 1,437 लोग घायल हुए थे
वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 1,626 हो गई।
वहीं सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का आंकड़ा लगभग स्थिर रहा।
पिछले साल इसी अवधि में 881 लोगों की मौत हुई थी
जबकि इस वर्ष अगस्त तक 884 लोगों की जान सड़क हादसों में जा चुकी है।
ऊधम सिंह नगर में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं
जिलेवार आंकड़ों में ऊधम सिंह नगर सबसे ऊपर रहा।
यहां अगस्त तक 356 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 295 हादसे दर्ज किए गए थे।
जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 229 लोगों की मौत हुई और 338 लोग घायल हुए।
इसके बाद देहरादून में 315 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
इन हादसों में 131 लोगों की मौत हुई, जबकि 322 लोग घायल हुए।
हरिद्वार में 312 सड़क दुर्घटनाएं हुईं।
यहां हादसों में 213 लोगों की मौत और 269 लोग घायल हुए।
वहीं नैनीताल में 220 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं।
इनमें 104 लोगों की जान गई और 334 लोग घायल हुए।
तेज रफ्तार बनी सड़क हादसों की बड़ी वजह
समीक्षा बैठक में पेश किए गए आंकड़ों में दुर्घटनाओं के पीछे कई कारण सामने आए।
इनमें ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाना प्रमुख वजहों में शामिल रहे।
आंकड़ों के अनुसार, तेज रफ्तार को 379 दुर्घटनाओं से जोड़ा गया।
वहीं गलत दिशा में वाहन चलाने के कारण 37 मामले सामने आए।
इसके अलावा शराब पीकर वाहन चलाने के 12 मामले दर्ज हुए।
मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़े दो मामले सामने आए
जबकि सीट बेल्ट या हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करने से चार दुर्घटनाएं संबंधित पाई गईं।
हिट एंड रन के 45 मामले, 33 लोगों की मौत
उत्तराखंड में हिट एंड रन मामलों को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं।
अगस्त 2026 तक राज्य में 45 हिट एंड रन मामले दर्ज किए गए, जिनमें 33 लोगों की मौत हुई।
इनमें से 29 मामलों का निपटारा किया जा चुका है
जबकि 16 मामले अभी लंबित हैं। पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर कुल 44.1 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
वर्ष 2025 में 75 हिट एंड रन मामले सामने आए थे
जिनमें 45 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 72 मामलों का निपटारा कर दिया गया था।
चारधाम यात्रा मार्गों पर लगेंगे ANPR कैमरे
बैठक में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
अधिकारियों को चारधाम यात्रा मार्गों पर
Automatic Number Plate Recognition (ANPR) कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
इन कैमरों की मदद से वाहनों की निगरानी करने
और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना है।
इसके साथ ही मौजूदा ANPR कैमरों की क्षमता बढ़ाने
और उनके जरिए अधिक प्रकार के ट्रैफिक उल्लंघनों की पहचान करने को भी कहा गया है।
पहाड़ी सड़कों पर क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान वाहनों के गहरी खाई में गिरने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए क्रैश बैरियर लगाने पर भी जोर दिया गया।
कमेटी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन पहाड़ी सड़कों पर अभी तक क्रैश बैरियर नहीं लगे हैं
वहां इन्हें लगाने के लिए समयसीमा तय की जाए।
नई क्रैश बैरियर व्यवस्था Indian Roads Congress (IRC) के निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
हर जिले को बनाया जाए ‘Zero Fatality District’
पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए हर जिले को
“Zero Fatality District” के लक्ष्य के साथ काम करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए
और सड़क सुरक्षा के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों को लागू किया जाना चाहिए।
सरकारी संस्थानों में लागू हों ‘No Helmet, No Entry’ जैसे नियम
सप्रे ने सरकारी कर्मचारियों और सरकारी संस्थानों में काम करने वाले लोगों को मोटर वाहन कानूनों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।
उन्होंने विशेष रूप से “No Helmet, No Entry”, “No Driving Licence, No Entry” और “No Vehicle Insurance, No Entry” जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इसी तरह के सुरक्षा नियमों को छात्रों के लिए भी लागू किया जाना चाहिए
ताकि सड़क सुरक्षा की आदतें कम उम्र से ही विकसित हों।
उत्तराखंड में सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़े राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
खासकर पहाड़ी इलाकों में क्रैश बैरियर, तेज रफ्तार पर नियंत्रण और आधुनिक निगरानी व्यवस्था लागू करना सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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