शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, रुपया 13 पैसे मजबूत

मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला।

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बुधवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।

हालांकि विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ

और 13 पैसे की बढ़त के साथ 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 48.78 अंक गिरकर 72,480.29 के स्तर पर बंद हुआ।

वहीं, एनएसई निफ्टी 95.75 अंक की गिरावट के साथ 22,620.45 पर आ गया।

चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी

बाजार में व्यापक कमजोरी के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली।

स्टॉक-विशिष्ट गतिविधियों के कारण कुछ शेयरों ने बाजार के रुख के विपरीत प्रदर्शन किया।

TCS समेत इन शेयरों में तेजी

बुधवार के कारोबार में TCS प्रमुख लाभ वाले शेयरों में शामिल रहा। इ

सके अलावा मिडकैप सेगमेंट में RVNL और Prestige Estates के शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई।

हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों पर दबाव

दूसरी ओर, हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

निफ्टी में Apollo Hospitals, Max Healthcare Institute

और Dr. Reddy’s Laboratories प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे मजबूत

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़त दर्ज की।

कारोबार के अंत में रुपया 13 पैसे मजबूत होकर 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में कुछ सुधार

और भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित बाजार गतिविधियों से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।

रुपये में मजबूती से उन भारतीय आयातकों को कुछ राहत मिल सकती है

जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल समेत अन्य वस्तुओं की खरीद के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है।

निफ्टी के लिए 22,600-22,550 का स्तर अहम

बाजार के तकनीकी रुझान पर नजर रखने वाले विश्लेषकों के मुताबिक

22,600 से 22,550 का क्षेत्र निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है।

बाजार की आगे की दिशा पर वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक घटनाक्रम

और अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े ब्याज दर संबंधी संकेत असर डाल सकते हैं।

निवेशकों के लिए बाजार में अस्थिरता के बीच कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन

और अन्य बुनियादी कारकों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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