रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर स्थित चीरबासा हेलीपैड के पास स्लाइडिंग जोन यात्रियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।
बारिश के बीच पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने की आशंका को देखते हुए SDRF ने यहां सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली है।
सोनप्रयाग से उप निरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में SDRF की टीम ने संवेदनशील हिस्से में तैनाती कर यात्रियों
को सुरक्षित तरीके से स्लाइडिंग जोन पार कराया। अभियान के दौरान करीब 9,000 यात्रियों को सुरक्षित रूप से इस हिस्से से निकाला गया।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार तैनात SDRF
चीरबासा क्षेत्र में पहले भी भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाओं के दौरान SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्य करती रही हैं।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रभावित पैदल मार्ग के बावजूद
जवान यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
बरसात के दौरान इस क्षेत्र में जोखिम बढ़ने के कारण यात्रियों को संवेदनशील हिस्से से निकालते समय विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
क्यों संवेदनशील है चीरबासा का इलाका?
चीरबासा क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा केवल बारिश के कारण नहीं बढ़ता। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी इसे संवेदनशील बनाती हैं।
- केदारनाथ पैदल मार्ग ऊंचे हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरता है।
- कई जगहों पर चट्टानों, मलबे और ढीली मिट्टी वाली ढलानें मौजूद हैं।
- बारिश के बाद पहाड़ी ढलानों के कमजोर होने से पत्थर और मलबा नीचे आने का खतरा बढ़ जाता है।
- कई हिस्सों में पैदल रास्ता पहाड़ी ढलान और नदी-नालों के बीच से होकर गुजरता है।
- अचानक पत्थर गिरने की स्थिति में यात्रियों के पास सुरक्षित स्थान पर हटने के लिए सीमित जगह होती है।
- यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ घोड़े और खच्चर भी इसी मार्ग से गुजरते हैं।
- लगातार आवाजाही से मार्ग के किनारों पर कटाव बढ़ने और जमीन कमजोर होने की स्थिति बन सकती है।
इन कारणों से चीरबासा और आसपास का क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग पर पहले भी हुए हादसे
बरसात के दौरान गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग वर्षों में इन घटनाओं में यात्रियों की मौतें हुई हैं।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2017 में 2, 2018 में 2, 2019 में 3, 2022 में 6, 2023 में 3 और 2024 में 3 लोगों की मौत हुई।
इसके अलावा 21 जुलाई 2024 को चीरबासा क्षेत्र में भूस्खलन की एक बड़ी घटना हुई थी।
इसमें तीन यात्रियों की मौत हुई थी, जबकि पांच लोग घायल बताए गए थे।
बारिश के बीच फिर बढ़ा बोल्डर गिरने का खतरा
वर्तमान में बारिश के कारण चीरबासा के आसपास पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
इसके चलते कई बार पैदल मार्ग बाधित होने की स्थिति बन रही है।
यात्रियों की आवाजाही के बीच लगातार बने इस जोखिम को देखते हुए SDRF ने संवेदनशील हिस्से में मोर्चा संभाला है।
टीम यात्रियों को निगरानी के बीच स्लाइडिंग जोन पार करा रही है
ताकि केदारनाथ यात्रा के दौरान किसी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके।
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