राजाजी टाइगर रिजर्व में घासभूमि प्रबंधन पर जोर, 45 फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षण

देहरादून: राजाजी टाइगर रिजर्व का नाम सुनते ही बाघ और हाथी जैसे वन्यजीवों की तस्वीर सामने आती है, लेकिन रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र में घास के मैदानों की भी अहम भूमिका है। विशेष रूप से शाकाहारी वन्यजीवों के लिए घासभूमि भोजन और सुरक्षित आवास का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसी को देखते हुए अब राजाजी टाइगर रिजर्व में घास के मैदानों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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दो दिवसीय प्रशिक्षण में वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी

घासभूमि को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राजाजी टाइगर रिजर्व में 17 और 18 सितंबर को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम WWF के सहयोग से हुआ। महाराष्ट्र के घास विशेषज्ञ डॉ. जीडी मुरतकर ने वन अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को घासभूमि के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि किसी घासभूमि की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल घास की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। स्थानीय प्रजातियों की पहचान, मिट्टी की स्थिति, खरपतवार नियंत्रण और आक्रामक वनस्पतियों को हटाने जैसे कई पहलुओं पर एक साथ काम करना जरूरी है।

स्थानीय घास के बीजों के संरक्षण पर भी जोर

कार्यक्रम में स्थानीय घास की प्रजातियों की पहचान और उनके संरक्षण को महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया।

विशेषज्ञों ने घास के बीजों को एकत्र करने, सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार उनका उपयोग करने की तकनीक समझाई।

इसके अलावा लैंटाना और अन्य खरपतवारों को हटाने के बाद खाली हुए स्थानों पर स्थानीय घास की

प्रजातियां विकसित करने के तरीकों की जानकारी भी दी गई। कुछ क्षेत्रों में बीजों का छिड़काव कर

प्राकृतिक घासभूमि को दोबारा विकसित करने की प्रक्रिया पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

लैंटाना और खरपतवार से निपटना बड़ी चुनौती

राजाजी टाइगर रिजर्व में घासभूमि संरक्षण के सामने एक बड़ी चुनौती ऐसी वनस्पतियां हैं

जो स्थानीय घास के विकास को प्रभावित करती हैं। इनमें लैंटाना जैसी आक्रामक प्रजातियां भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि केवल लैंटाना या अन्य खरपतवार को हटाना ही पर्याप्त नहीं है।

इसके बाद उस क्षेत्र में स्थानीय घास की प्रजातियों का पुनर्स्थापन करना भी जरूरी है।

इससे खाली पड़े हिस्सों को धीरे-धीरे उपयोगी घासभूमि में बदला जा सकता है।

घासभूमि का विकास वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा

घास के मैदान शाकाहारी वन्यजीवों के लिए भोजन का प्रमुख स्रोत हैं।

ऐसे में स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण घासभूमि का सीधा संबंध वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ जाता है।

शाकाहारी वन्यजीव खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनके लिए पर्याप्त

प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराना पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अहम माना जाता है।

राजाजी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक शिरीष ने भी प्रशिक्षण के दौरान घासभूमि विकास को वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि रिजर्व के वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्रों में शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लैंटाना

और अन्य खरपतवार से प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय घास की प्रजातियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

सभी 10 रेंज के कर्मचारियों ने लिया हिस्सा

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजाजी टाइगर रिजर्व की सभी 10 रेंज के अधिकारियों और करीब 45 फील्ड स्टाफ ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य कर्मचारियों को घासभूमि की पहचान, संरक्षण, पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना रहा।

वन विभाग के स्तर पर घासभूमि प्रबंधन को लेकर इस तरह के प्रशिक्षण से रिजर्व के

अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार घास के मैदानों के संरक्षण

और विकास की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है।

 

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