उत्तरकाशी: भटवाड़ी ब्लॉक के भंगेली गांव में बच्चों समेत करीब 20 से 25 ग्रामीणों में फोड़े-फुंसियों की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य टीम गांव पहुंची और प्रभावित लोगों की जांच कर उन्हें जरूरी दवाएं उपलब्ध कराईं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, करीब 9 बच्चे भी इस समस्या से प्रभावित बताए गए हैं। डॉक्टरों की टीम बच्चों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ग्राम प्रधान संदीप सिंह के मुताबिक, फिलहाल सभी बच्चों की हालत सामान्य है।
9 बच्चों समेत 20-25 लोगों की हुई जांच
ग्राम प्रधान संदीप सिंह ने बताया कि गांव में करीब 10 से 15 वर्ष की उम्र के कुछ बच्चों के शरीर पर फोड़े-फुंसियां होने की जानकारी मिली थी।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर प्रभावित बच्चों समेत लगभग 20-25 लोगों की जांच की।
जांच के बाद सभी को आवश्यक दवाएं दी गईं। ग्रामीणों का कहना है
कि जल जीवन मिशन के तहत नए जलस्रोत को गांव की पेयजल लाइन से जोड़ने के बाद त्वचा संबंधी शिकायतें सामने आई हैं।
इसी वजह से ग्रामीणों ने पेयजल के नमूनों की जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि ग्रामीणों में त्वचा संबंधी समस्या पेयजल की वजह से हुई है।
बारिश और साफ-सफाई की कमी भी हो सकती है वजह
उत्तरकाशी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम विजय सिंह ने बताया कि बारिश के
मौसम में नमी के कारण बैक्टीरिया पनपने की संभावना बढ़ जाती है।
साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी भी त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में प्रभावित लोगों की निगरानी कर रही है। उपचार के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार बताया गया है
और जरूरत पड़ने पर उनकी दोबारा जांच भी कराई जाएगी।
कॉक्ससैकी वायरस की खबर को बताया अफवाह
सीएमओ ने गांव में कॉक्ससैकी वायरस संक्रमण फैलने की चर्चा को निराधार बताया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों से बिना पुष्टि वाली जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रख रही है।
पेयजल के सैंपल जांच के लिए भेजने के निर्देश
मामले को देखते हुए सीएमओ ने जल संस्थान को पेयजल के नमूने लेकर उनकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी गुणवत्ता और किसी संभावित संक्रमण को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला ने पानी की वजह से फोड़े-फुंसियां होने के दावे को फिलहाल सही नहीं माना है।
उनका कहना है कि दूषित पानी से आमतौर पर पेट संबंधी बीमारियां हो सकती है
लेकिन त्वचा पर फोड़े-फुंसियों को सीधे तौर पर पेयजल से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल पेयजल में किसी तरह की समस्या सामने नहीं आई है।
हालांकि, पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर और साफ होगी।
ये भी पढ़े : https://uttarakhandhighlights.com/laksar-woman-complaint-against-husband/
![]()
