सत्य निकेतन हादसे के बाद हॉस्टलों की सुरक्षा जांच की मांग - Uttarakhand Highlights

सत्य निकेतन हादसे के बाद हॉस्टलों की सुरक्षा जांच की मांग

Rain Water Harvesting

नई दिल्ली: सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित PG

निजी हॉस्टल और अन्य स्टूडेंट हाउसिंग की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत से अपील की है

कि दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे ऐसे सभी आवासीय ठिकानों का निरीक्षण और सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।

बार-बार हो रहे हादसों पर उठे सवाल

रिपोर्ट में सत्य निकेतन की हालिया घटना को अप्रैल 2022 में हुए पुराने हादसे से जोड़ते हुए चिंता जताई गई है।

उस घटना में भी इमारत गिरने से दो लोगों की जान गई थी, जबकि चार लोग घायल हुए थे।

एक ही इलाके में दोबारा ऐसी घटना सामने आने से दिल्ली में जर्जर और असुरक्षित इमारतों की पहचान तथा बिल्डिंग नियमों के पालन को लेकर व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

कॉलेजों के आसपास और निजी जांच के दायरे में आएं

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के आसपास बड़ी संख्या में PG और प्राइवेट हॉस्टल संचालित हैं।

इनमें से कई जगहों पर मूल रूप से आवासीय इस्तेमाल के लिए बनी इमारतों का उपयोग छात्रों के रहने के लिए किया जा रहा है।

ऐसी इमारतों में बिना अनुमति निर्माण, अतिरिक्त मंजिल

बेसमेंट में बदलाव या जमीन के निर्धारित उपयोग में परिवर्तन की आशंका को देखते हुए व्यापक जांच की जरूरत बताई गई है।

सुरक्षा जांच में इन बिंदुओं पर हो ध्यान

एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से इन पहलुओं की जांच करनी चाहिए:

  • स्वीकृत बिल्डिंग प्लान
  • वास्तविक निर्माण और मंजिलों की संख्या
  • बेसमेंट में किए गए निर्माण या बदलाव
  • जमीन के स्वीकृत उपयोग की स्थिति
  • भवन की संरचनात्मक मजबूती
  • फायर सेफ्टी नियमों का पालन
  • प्रवेश और आपातकालीन निकास की व्यवस्था
  • इमारत की जर्जर या खतरनाक स्थिति

सुप्रीम कोर्ट पहले भी बना चुका है कमेटी

रिपोर्ट में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण से जुड़े मामलों पर पहले से सुनवाई कर रहा है।

अदालत के 9 जुलाई 2026 के आदेश के बाद लाजपत नगर

साकेत और मालवीय नगर में इमारतों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी।

हालांकि, सत्य निकेतन उस जांच के निर्धारित क्षेत्र में शामिल नहीं था।

रिपोर्ट के मुताबिक इन क्षेत्रों में निरीक्षण का काम 3 सितंबर 2026 को पूरा किया जा चुका है।

जांच के दौरान सैदुलाजाब, साकेत और लाजपत नगर में कुछ ऐसी इमारतें भी सामने आईं

जिन्हें बेहद असुरक्षित बताया गया है। कमेटी की रिपोर्ट तैयार की जा रही है

और इसे जल्द अदालत के समक्ष रखा जा सकता है।

Supreme Court of India

पूरे देश में अवैध निर्माण की जांच का भी निर्देश

रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य आदेश का भी उल्लेख किया गया है।

25 मार्च को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने आवासीय संपत्तियों के गलत इस्तेमाल

जमीन के अनधिकृत उपयोग से जुड़े मामलों की देशभर में जांच के निर्देश दिए थे।

यह आदेश तमिलनाडु से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आया था।

सुनवाई में अदालत ने बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर चिंता जाहिर की थी।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर यह मांग महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यदि कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित PG तथा निजी हॉस्टलों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट होता है

तो जर्जर भवनों और नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों की पहचान समय रहते की जा सकती है।

 

 

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