B.Sc. MLT : कर्मचारियों का धरना 100 दिन पूरा, चार मांगों को लेकर सरकार से आर-पार की तैयारी

देहरादून: बीएससी एमएलटी यानी बैचलर ऑफ साइंस इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी संवर्ग के कर्मचारियों का एकता विहार में चल रहा आंदोलन 100 दिन पूरे कर चुका है। लंबे समय से मांगों को लेकर धरने पर बैठे लैब टेक्नीशियनों ने अब सरकार से जल्द ठोस और सकारात्मक निर्णय लिए जाने की उम्मीद जताई है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्होंने सचिवालय कूच करने के साथ ही दो बार मुख्यमंत्री आवास का घेराव भी किया। लगातार प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कराई गई।

11 अगस्त को CM धामी से हुई मुलाकात

आंदोलनकारी लैब टेक्नीशियनों के प्रतिनिधिमंडल ने 11 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं सामने रखीं। कर्मचारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वित्त सचिव, कार्मिक सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों को मामले पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद शासन की ओर से 31 तारीख को बैठक आयोजित करने संबंधी पत्र भी मिला है, जिसमें आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया है।

26 साल से उपेक्षा का आरोप

बीएससी एमएलटी संवर्ग के कर्मचारियों का दावा है कि वे पिछले 26 वर्षों से सेवा नियमावली जैसी मूलभूत व्यवस्था से वंचित हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से समस्याएं उठाने के बावजूद उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

अब 100 दिन के आंदोलन के बाद कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रस्तावित बैठक में सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला लेगी।

क्या हैं लैब टेक्नीशियनों की चार प्रमुख मांगें?

आंदोलनरत कर्मचारियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से चार मांगें रखी हैं:

  1. IPHS मानकों के अनुसार पदों का सृजन किया जाए।
  2. वर्षवार मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाए।
  3. लंबे समय से नियुक्ति से वंचित लैब टेक्नीशियनों को आयु सीमा में छूट दी जाए।
  4. सरकारी लैबों के निजीकरण को खत्म कर वहां नियमित सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।

निजीकरण खत्म करने की मांग

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकारी लैबों में निजी कंपनियों के बजाय नियमित सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। संघ का दावा है कि सरकार की ओर से सरकारी लैबों के निजीकरण को समाप्त करने और सरकारी कर्मचारियों की तैनाती को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।

मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ के महासचिव मयंक राणा के मुताबिक, अगर सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो यह लंबे समय से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी। वहीं, मांगों पर फैसला नहीं होने की स्थिति में उन्होंने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।

अब सभी की नजर 31 तारीख को होने वाली बैठक पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में बीएससी एमएलटी संवर्ग की मांगों को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे की दिशा तय हो सकती है।

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