नैनीताल: रानीखेत कैंटोनमेंट बोर्ड की भूमि पर कथित अनधिकृत कब्जे को लेकर जारी कारण बताओ नोटिस के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति देते हुए संबंधित भूमि पर पांच सप्ताह तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने की। अदालत के समक्ष हीरा सिंह रावत समेत पांच याचिकाएं पेश की गई थीं। इन याचिकाओं में रानीखेत कैंटोनमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से 1 अगस्त को जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई थी।
24.55 वर्गमीटर जमीन पर कब्जे का आरोप
कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था कि रानीखेत के धौलीखेत क्षेत्र में स्थित सर्वे नंबर 102 की बी-3 भूमि के करीब 24.55 वर्गमीटर हिस्से पर कथित तौर पर बिना अधिकार कब्जा किया गया है। बोर्ड का कहना था कि संबंधित लोग उक्त परिसर के वैध लीजधारक नहीं हैं।
बोर्ड ने हाईकोर्ट को बताया कि अदालत के 8 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में संबंधित भूमि का निरीक्षण कराया गया था। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर ही याचिकाकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
निरीक्षण रिपोर्ट नहीं मिलने पर उठाया सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्हें भूमि निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में उनके लिए नोटिस का प्रभावी और तथ्यात्मक जवाब दाखिल करना मुश्किल है।
इस पर कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि निरीक्षण रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ताओं को 48 घंटे के भीतर उपलब्ध करा दी जाएगी।
15 दिन में जवाब, तीन सप्ताह में फैसला
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस का जवाब 15 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जवाब मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी उस पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय ले।
इस अवधि के दौरान संबंधित भूमि के कब्जे की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले में पांच सप्ताह तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
