देहरादून: उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए
राज्य सरकार कौशल विकास प्रशिक्षण व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है।
अब प्रदेश में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और उपयोगिता की जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट किया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि युवाओं को दिए जा रहे प्रशिक्षण से उन्हें वास्तव में रोजगार मिल रहा है
या नहीं और क्या ये कार्यक्रम उद्योगों की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप हैं।
सरकार का फोकस कौशल विकास योजनाओं को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार से जोड़ने पर है।
इसके तहत उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग अधिक है
लेकिन संबंधित कौशल सिखाने वाले पाठ्यक्रमों की कमी है।
इसी आधार पर नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने
और कम उपयोगी या गैर-जरूरी पाठ्यक्रमों की समीक्षा करने की योजना है।
जिलों की जरूरतों के आधार पर बनेगा स्किल डेवलपमेंट प्लान
राज्य में कौशल विकास की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश
और जिला स्तर पर रोजगार की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
इसमें स्थानीय उद्योगों की मांग, उपलब्ध प्रशिक्षण संस्थानों
और युवाओं के लिए मौजूद रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखा जाएगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित बैठक में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अधिकारियों
उद्योग जगत और निजी प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य का स्किल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने पर चर्चा हुई।
इस योजना के तहत प्रत्येक जिले के लिए अलग डिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाएगा।
इन योजनाओं को पोर्टल पर अपलोड किया जाना है
ताकि संबंधित जिलों में कौशल प्रशिक्षण की जरूरतों
और रोजगार की संभावनाओं का स्पष्ट आकलन किया जा सके।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता जांचने के लिए तय होंगे मानक
प्रदेश में अलग-अलग संस्थानों द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की
गुणवत्ता में समानता लाने के लिए प्रशिक्षण के मानक निर्धारित करने की तैयारी है।
इसके साथ ही नियमित मूल्यांकन और स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट के माध्यम से यह जांचा जाएगा
कि प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित उद्देश्यों को पूरा कर रहे हैं या नहीं।
ऑडिट के दौरान प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उसकी उपयोगिता
और रोजगार की वास्तविक जरूरतों के बीच तालमेल पर ध्यान दिया जाएगा।
इससे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनमें सुधार की आवश्यकता है।
साथ ही, जिन पाठ्यक्रमों की रोजगार बाजार में मांग कम है
उनकी समीक्षा कर जरूरत के अनुसार बदलाव किए जा सकेंगे।
उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
कौशल विकास कार्यक्रमों को अधिक रोजगारपरक बनाने के लिए उद्योगों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस प्रक्रिया में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII)
और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों के सहयोग से प्रशिक्षण की जरूरतों को समझने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसके अलावा, उभरते हुए कौशल क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सेतु आयोग के अध्ययन का भी उपयोग किया जाएगा।
इससे भविष्य में रोजगार के नए अवसरों और उद्योगों में आवश्यक कौशल की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता
और उद्योगों की वास्तविक मांग के बीच अंतर का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
इस जानकारी के आधार पर भविष्य की प्रशिक्षण योजनाओं को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
रोजगार से जोड़ने पर रहेगा सरकार का जोर
उत्तराखंड में कौशल विकास कार्यक्रमों की समीक्षा का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को ऐसे कौशल उपलब्ध कराना है
जिनकी जरूरत निजी कंपनियों, उद्योगों और अन्य रोजगार क्षेत्रों में है।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता की नियमित जांच
और उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
अब प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता का आकलन करके यह तय करने पर जोर रहेगा कि किन क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए
और किन मौजूदा कार्यक्रमों में सुधार की जरूरत है।
इससे कौशल विकास योजनाओं को राज्य की रोजगार संबंधी आवश्यकताओं के अधिक करीब लाने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर नए सिरे से लिखी गई है।
प्रकाशन से पहले सरकारी बैठक, अधिकारियों के बयान और योजना की वर्तमान स्थिति से संबंधित तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें।
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