SIR विवाद पर CM धामी का बयान, बोले- ज्ञानेश कुमार से पहले भी NDA जीतती रही - Uttarakhand Highlights

SIR विवाद पर CM धामी का बयान, बोले- ज्ञानेश कुमार से पहले भी NDA जीतती रही

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देहरादून: देशभर में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है।

विपक्षी दल SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

6 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च निकाला।

इसी मुद्दे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था

और उससे पहले भी NDA कई चुनाव जीतती रही है। चुनाव आयोग की आधिकारिक

वेबसाइट के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

SIR को लेकर दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन

SIR को लेकर विपक्षी दलों का चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध लगातार जारी है। विपक्षी नेताओं की मांग है

कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर अधिक पारदर्शिता बरती जाए और CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।

6 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्षी सांसदों के मार्च के दौरान कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

दूसरी ओर, सरकार और चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने तथा अपात्र या डुप्लीकेट नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया गया है।

उत्तराखंड में भी SIR को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में

नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।

इसी राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने SIR का बचाव करते हुए कहा

कि यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची को व्यवस्थित

और शुद्ध करने के उद्देश्य से ऐसी प्रक्रिया पहले भी अपनाई जाती रही है।

CM धामी ने उठाए मतदाता सूची से जुड़े सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के जरिए ऐसे नामों की पहचान करना जरूरी है

जो कथित तौर पर एक से अधिक राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज हैं या जो मतदाता के रूप में पात्र नहीं हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम कई राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज है

तो क्या उसे हर जगह मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। धामी के अनुसार

मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों को हटाने और सूची को व्यवस्थित करने के लिए प्रक्रिया जरूरी है।

‘पहले भी चुनाव जीतती रही है NDA’

CEC को लेकर विपक्ष के विरोध पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से

पहले भी भाजपा और NDA कई चुनाव जीत चुकी है।

उन्होंने विपक्ष पर चुनावी नतीजों के बाद अलग-अलग संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। धामी ने कहा

कि कभी EVM, कभी प्रशासनिक व्यवस्था और कभी चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

हालांकि ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान हैं और विपक्ष इन आरोपों तथा SIR की प्रक्रिया को लेकर अलग रुख रखता है।

चुनाव आयोग पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

विपक्षी INDIA ब्लॉक ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है।

वहीं, चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं।

SIR को लेकर सरकार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी यह विवाद अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

आने वाले दिनों में मतदाता सूची और SIR से जुड़े मामलों पर होने वाली कानूनी और चुनावी प्रक्रियाओं पर भी नजर रहेगी।

 

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