देहरादून: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सक्रियता को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत से उनकी व्यक्तिगत यात्रा और कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था
लेकिन इसके बावजूद रावत ने 5 अक्टूबर को जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ जारी रखी।
रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की आपत्ति के बीच पार्टी महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने भी उन्हें दिल्ली बुलाया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश कांग्रेस चुनावी तैयारियों में जुटी है
और पार्टी नेतृत्व राज्य में एकजुटता का संदेश देने पर जोर दे रहा है।
सैलजा ने रावत से यात्रा रोकने का किया था आग्रह
कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत को पत्र लिखकर उनकी प्रस्तावित यात्रा को लेकर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, सैलजा ने कहा कि यात्रा के संबंध में न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई थी।
उन्होंने चुनाव नजदीक होने का हवाला देते हुए कहा कि इस समय कांग्रेस को एकजुट होकर जनता के सामने जाना चाहिए।
पत्र में रावत के कार्यक्रम को पार्टी के आधिकारिक संगठनात्मक कार्यक्रमों से अलग एक समानांतर गतिविधि के तौर पर
देखे जाने की चिंता भी जताई गई। सैलजा ने उनसे ऐसे कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया।

चिट्ठी के बाद भी रावत ने जारी रखा कार्यक्रम
सैलजा की आपत्ति के बाद भी हरीश रावत पीछे नहीं हटे। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए
5 अक्टूबर के कार्यक्रमों की जानकारी साझा की और जसपुर से हल्द्वानी तक यात्रा जारी रखने की बात कही।
रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा जसपुर से शुरू होकर काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक पहुंचने वाली थी।
रावत ने अपने संदेशों में इसे उत्तराखंड की जनता के साथ संवाद और धन्यवाद से जुड़ा कार्यक्रम बताया।
रावत ने अपने एक संदेश में बीमारी के दौरान मिले लोगों के समर्थन का जिक्र करते हुए कहा
कि वह प्रदेश की जनता के प्रति आभार व्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने ईडी और सीबीआई से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया
और कहा कि इन परिस्थितियों में उनके समर्थक उनके साथ खड़े हैं।

रावत की सक्रियता से क्यों बढ़ी कांग्रेस की चिंता?
हरीश रावत की राजनीतिक सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है
जब उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
रावत की व्यक्तिगत यात्राओं और जनसंवाद कार्यक्रमों को लेकर
कांग्रेस नेतृत्व की चिंता मुख्य रूप से संगठनात्मक समन्वय से जुड़ी बताई जा रही है।
कांग्रेस नेतृत्व का पक्ष यह है कि चुनावी समय में पार्टी के कार्यक्रम
और वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियां संगठन की व्यापक रणनीति के साथ तालमेल में होनी चाहिए।
वहीं रावत अपने कार्यक्रमों को जनता से संवाद और धन्यवाद से जोड़कर आगे बढ़ा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड कांग्रेस में नेतृत्व, संगठन और वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा को फिर तेज कर दिया है।
बेटी अनुपमा रावत ने पिता का किया समर्थन
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच हरीश रावत की बेटी
और कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने भी अपने पिता के समर्थन में सोशल मीडिया पर संदेश साझा किया।
उन्होंने अपने संदेश में हरीश रावत के आत्मबल और जनता के लिए काम करने की इच्छा का उल्लेख करते हुए कहा
कि राज्य में सुशासन की जरूरत है। अनुपमा रावत ने अपने पिता के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खड़े होने की बात भी कही।
उनका यह संदेश ऐसे समय आया है जब रावत और कांग्रेस नेतृत्व के बीच उनकी यात्रा को लेकर मतभेद सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुके हैं।
प्रीतम सिंह के साथ तस्वीर ने भी बढ़ाई चर्चा
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य प्रीतम सिंह के साथ अपनी तस्वीर भी साझा की।
इसके बाद पार्टी के भीतर इस तस्वीर को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं।
हालांकि, केवल तस्वीर के आधार पर दोनों नेताओं के बीच किसी राजनीतिक रणनीति या भविष्य की दिशा को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इतना जरूर है कि रावत की लगातार बढ़ती सक्रियता और पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
कांग्रेस हाईकमान ने रावत को दिल्ली बुलाया
रावत की यात्रा को लेकर बढ़े विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने उन्हें दिल्ली बुलाया है।
रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व रावत की हालिया राजनीतिक गतिविधियों और व्यक्तिगत यात्रा को लेकर उनसे बातचीत करना चाहता है।
यह घटनाक्रम बताता है कि मामला अब केवल प्रदेश स्तर की चर्चा तक सीमित नहीं रहा है।
कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी इस पूरे मामले पर सक्रिय हो गया है।
आगे क्या होगा, कांग्रेस की रणनीति पर नजर
फिलहाल हरीश रावत ने अपनी जनसंवाद यात्रा को रोकने के बजाय आगे बढ़ाने का फैसला किया है
जबकि कांग्रेस नेतृत्व संगठनात्मक अनुशासन और चुनाव से पहले एकजुटता पर जोर दे रहा है।
ऐसे में आने वाले दिनों में रावत और कांग्रेस नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण होगी।
यह देखना भी अहम होगा कि उनकी भविष्य की यात्राओं
और कार्यक्रमों को पार्टी संगठन के साथ किस तरह समन्वित किया जाता है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है
क्योंकि पार्टी को एक तरफ अपने वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और जनाधार का इस्तेमाल करना है
वहीं दूसरी ओर संगठन की सामूहिक चुनावी रणनीति के साथ तालमेल भी बनाए रखना होगा।
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