उत्तराखंड में दो बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी का आज निधन हो गया। उनकी बेटी विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भूषण ने पिता के नाम संदेश लिखा। उन्होंने लिखा ‘ आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं। मैंने केवल अपने पिता को नहीं खोया, बल्कि अपने जीवन के सबसे बड़े संबल, मार्गदर्शक और उस व्यक्तित्व को विदा किया है जिसकी छाया में मैंने ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, अनुशासन और राष्ट्र सेवा तथा उत्तराखंड का अर्थ समझा।’
मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम का मार्ग नहीं चुना। 1991 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश कर उन्होंने जनसेवा को अपना नया दायित्व बनाया। गढ़वाल की जनता ने उन्हें बार-बार संसद भेजा और उन्होंने सांसद, केंद्रीय मंत्री तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। भारत सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए उन्होंने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी ऐतिहासिक योजनाओं को गति दी, जिसने आधुनिक भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल सादगी, पारदर्शिता और सुशासन का पर्याय बना। मजबूत लोकायुक्त कानून, प्रशासनिक सुधार और जनहित को सर्वोच्च रखने का उनका आग्रह सदैव याद रखा जाएगा। लेकिन मेरे लिए उनकी सबसे बड़ी पहचान किसी पद या सम्मान से नहीं थी। वे मेरे पिता थे-कम बोलने वाले, लेकिन मूल्यों पर अडिग; कठोर दिखने वाले, लेकिन भीतर से अत्यंत संवेदनशील। उन्होंने हमें सिखाया कि जीवन में ईमानदारी सबसे बड़ी पूँजी है, और पद की गरिमा व्यक्ति के आचरण से बनती है।
उनका जाना मेरे और हमारे पूरे परिवार के लिए एक ऐसी रिक्तता है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। फिर भी यह संतोष रहेगा कि उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति ईमानदार दायित्व निभाते हुए जिया। पिताजी, आपने हमें केवल जीवन नहीं दिया—जीवन जीने के मूल्य दिए। आपका अनुशासन, आपका साहस, आपकी सत्यनिष्ठा और आपकी सीख सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।