नई दिल्ली: दशहरा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान घरों में पकवानों, मिठाइयों और स्वादिष्ट व्यंजनों की भरमार रहती है।
लेकिन अनियमित खान-पान, देर रात तक जागने और बाहर के भोजन के अधिक सेवन से पाचन संबंधी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
ऐसे में त्योहारों का आनंद लेते हुए सेहत का ध्यान रखना जरूरी है।
आहार विशेषज्ञों और डॉक्टरों के मुताबिक, खान-पान में थोड़ी सावधानी, साफ-सफाई
और संतुलित दिनचर्या अपनाकर पेट की समस्याओं और खाद्य जनित संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
मिठाइयों से पूरी तरह दूरी बनाने के बजाय सही मात्रा में खाना, पर्याप्त पानी पीना
और भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक उपयोगी है।
त्योहारों में पाचन ठीक रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
डाइटीशियन शिखा शर्मा के अनुसार, त्योहारों के दौरान भोजन में संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
दिन की शुरुआत सामान्य पानी या गुनगुने पानी से की जा सकती है।
अदरक या तुलसी से बना पेय भी पसंद के अनुसार लिया जा सकता है
लेकिन किसी विशेष पेय को पाचन संबंधी समस्या का निश्चित इलाज नहीं समझना चाहिए।
उन्होंने फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने पर जोर दिया।
ओट्स, ताजे फल, सलाद, साबुत अनाज और सब्जियां फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
पर्याप्त पानी पीने और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ इनका सेवन कब्ज जैसी समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है।
इसबगोल या अन्य सप्लीमेंट लेने से पहले अपनी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
मिठाइयों के लिए अपनाएं स्मार्ट विकल्प
त्योहारों में मिठाइयों का आनंद लेना स्वाभाविक है, लेकिन इनकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
शिखा शर्मा के अनुसार, खजूर, किशमिश और गुड़ का इस्तेमाल कुछ व्यंजनों में किया जा सकता है।
हालांकि, इनमें भी प्राकृतिक या अतिरिक्त शर्करा और कैलोरी होती हैं
इसलिए इन्हें पूरी तरह शुगर-फ्री विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
मिठाई के विकल्प के रूप में ताजे फल, अनार या घर पर तैयार किए गए कम मीठे व्यंजन भी आजमाए जा सकते हैं।
बच्चों को फल और थोड़ी मात्रा में चॉकलेट से तैयार स्नैक्स देना भी एक विकल्प है।
सबसे जरूरी बात यह है कि मीठा खाते समय मात्रा का ध्यान रखें और बार-बार मिठाई खाने से बचें।
खाना पकाने के तेल और उपवास में रखें सावधानी
त्योहारी व्यंजन तैयार करते समय तेल की गुणवत्ता और उसकी मात्रा दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
घर में खाना बनाने के लिए उपयुक्त खाद्य तेल का इस्तेमाल करें और एक ही तेल को बार-बार तेज गर्म करके इस्तेमाल करने से बचें।
उपवास रखने वाले लोगों को भी शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
यदि उपवास के नियम अनुमति देते हैं, तो पानी, खीरा और नारियल पानी जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं।
उपवास खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन खाने के बजाय हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर है।
ओवरईटिंग से बचने के लिए अपनाएं माइंडफुल ईटिंग
त्योहारों में दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भोजन करते समय जरूरत से ज्यादा खाना आसान हो जाता है।
ऐसे में धीरे-धीरे खाएं और पेट भरने का अहसास होने पर रुक जाएं।
एक संतुलित थाली में सब्जियां, प्रोटीन के स्रोत और साबुत अनाज शामिल किए जा सकते हैं।
भोजन की मात्रा व्यक्ति की उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार अलग हो सकती है।
डाइटीशियन की सलाह है कि किसी खास खाद्य पदार्थ को लेकर अनावश्यक डर पैदा करने के बजाय संतुलन पर ध्यान दें।
कभी-कभार पसंदीदा व्यंजन खाना समस्या नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि पूरे दिन का खान-पान संतुलित रहे।
ज्यादा खाने के बाद पेट खराब हो तो क्या करें?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद अहमद के अनुसार, त्योहारों में जरूरत से ज्यादा खाने से पेट भारी होना, गैस
और अपच जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में भोजन पूरी तरह छोड़ने के बजाय हल्का भोजन करें
और अपनी भूख के अनुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं।
कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. मानसी निगम ने भी देर रात भारी भोजन करने से बचने की सलाह दी।
यदि पेट में परेशानी महसूस हो रही है, तो कम तेल-मसाले वाला भोजन लेना बेहतर हो सकता है।
यदि दर्द तेज हो, बार-बार उल्टी आए या परेशानी लगातार बनी रहे, तो इसे केवल ओवरईटिंग मानकर नजरअंदाज न करें।
खराब भोजन और दूषित पानी से हो सकते हैं संक्रमण
त्योहारों के दौरान बाहर का भोजन खाते समय स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
दूषित भोजन या पानी से गैस्ट्रोएंटेराइटिस, वायरल डायरिया और हेपेटाइटिस A या E जैसे संक्रमण हो सकते हैं।
कुछ संक्रमणों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, खुले में लंबे समय तक रखा भोजन, ठीक से न पकाया गया खाना
और उचित तापमान पर स्टोर नहीं किए गए खाद्य पदार्थ संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
स्ट्रीट फूड खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- साफ-सुथरी जगह पर तैयार किया गया ताजा भोजन चुनें।
- खुले में रखी मिठाइयों और खाद्य पदार्थों से बचें।
- साफ और सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल करें।
- कच्चे और पके हुए भोजन को अलग रखें।
- डेयरी उत्पादों और मेयोनेज से बने व्यंजनों के उचित भंडारण पर ध्यान दें।
- लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा पका हुआ भोजन खाने से बचें।
बच्चों में फूड पॉइजनिंग के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. कन्नैयन आर के अनुसार, त्योहारों के दौरान बच्चों के खान-पान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
फूड पॉइजनिंग या गैस्ट्रोएंटेराइटिस होने पर बच्चों में बार-बार उल्टी, पानी जैसे दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
शरीर में पानी की कमी के संकेतों में मुंह सूखना, पेशाब कम होना, आंखें धंसना और असामान्य सुस्ती शामिल हैं।
छोटे बच्चों और शिशुओं में डिहाइड्रेशन तेजी से गंभीर हो सकता है।
इन लक्षणों पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
- मल में खून आना।
- पेट में तेज या लगातार दर्द होना।
- बार-बार उल्टी होने से तरल पदार्थ न रुक पाना।
- बहुत कम पेशाब आना या अत्यधिक कमजोरी होना।
- सांस लेने में कठिनाई या चेहरे और होंठों पर सूजन आना।
खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों और अन्य एडिटिव्स की सुरक्षा उनकी स्वीकृति, मात्रा
और गुणवत्ता पर निर्भर करती है। बच्चों के लिए बिना लेबल वाले या असामान्य रूप से चमकीले रंगों वाले उत्पाद खरीदने से बचें।
पैकेट पर सामग्री, एक्सपायरी डेट और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर जांचें।
फूड पॉइजनिंग होने पर सबसे पहले क्या करें?
फूड पॉइजनिंग में उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है।
ऐसे में ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार लेना मददगार हो सकता है।
बच्चों और गंभीर लक्षणों वाले मरीजों में चिकित्सकीय सलाह लेना विशेष रूप से जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स या दस्त रोकने वाली दवाएं न लें।
हर संक्रमण में इनकी जरूरत नहीं होती और कुछ स्थितियों में ये नुकसान पहुंचा सकती हैं।
यदि तेज बुखार, खून वाले दस्त, लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द या डिहाइड्रेशन के संकेत हों, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें।
मिठाइयां खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के पूर्व सदस्य बेजोन मिश्रा के अनुसार
त्योहारों के दौरान खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे साफ-सफाई, उचित भंडारण
और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें।
ग्राहकों को भी मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
- भरोसेमंद दुकान या प्रतिष्ठान से मिठाइयां खरीदें।
- पैकेट पर निर्माण और एक्सपायरी डेट की जांच करें।
- पैकेजिंग क्षतिग्रस्त होने पर उत्पाद न खरीदें।
- बिना लेबल वाले उत्पादों से बचें।
- मिठाइयों और डेयरी उत्पादों के भंडारण की स्थिति पर ध्यान दें।
- खाद्य पदार्थों को साफ बर्तनों से संभालें और घर पर उचित तापमान में रखें।
त्योहारों की खुशियां बनाए रखने के लिए खान-पान पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की जरूरत नहीं है।
संतुलित भोजन, साफ पानी, सुरक्षित मिठाइयां और समय पर चिकित्सा सहायता से त्योहारों का आनंद लेते हुए
अपनी और परिवार की सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।
ये भी पढ़े : https://uttarakhandhighlights.com/2026/10/19/gangotri-dham-kapat-closing-date-2026/
![]()