देहरादून: नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल करते हैं।
इसी वजह से त्योहारों के समय इन खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है।
पिछले साल नवरात्रि के दौरान कुट्टू के आटे से बने व्यंजन खाने के बाद कई लोगों के बीमार होने के मामले सामने आए थे।
इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ाते हुए खुले में कुट्टू का आटा बेचने पर रोक लगाने
और पैकेट बंद आटे की बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
अब नवरात्रि के मद्देनजर उत्तराखंड का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) फिर सतर्क हो गया है।
विभाग ने अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और बिक्री व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही के कारण जनहानि होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नवरात्रि में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की मांग
नवरात्रि के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और बाजारों में भी खरीदारी बढ़ गई है।
व्रत रखने वाले लोग फलाहार के साथ कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजनों का सेवन करते हैं।
ऐसे में इन उत्पादों की शुद्धता और सुरक्षित बिक्री सुनिश्चित करना खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए अहम हो जाता है।
पिछले साल आटा खाने से बीमार हुए थे लोग
पिछले साल मार्च में नवरात्रि के दौरान कुट्टू के आटे से बने खाद्य पदार्थ खाने के बाद कई लोगों के बीमार होने की घटनाएं सामने आई थीं।
इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की थी।
कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में कुट्टू का आटा नष्ट किया गया था।
इन घटनाओं के बाद विभाग ने खुले में कुट्टू का आटा बेचने के बजाय पैकेट बंद उत्पादों की बिक्री पर जोर दिया।
अब बाजारों में सीलबंद पैकेट में आटा बेचा जा रहा है। कुछ दुकानदार साबुत कुट्टू भी उपलब्ध करा रहे हैं
ताकि ग्राहक उसे पिसवाकर इस्तेमाल कर सकें।
160 रुपये से बढ़कर 180 रुपये किलो हुआ कुट्टू का आटा
दुकानदारों के मुताबिक, पैकेट बंद आटे की बिक्री के कारण इसकी कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है।
पिछले साल तक कुट्टू का आटा करीब 160 रुपये प्रति किलो बिक रहा था
जबकि अब इसकी कीमत लगभग 180 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है।
दुकानदार राजेश अग्रवाल के अनुसार, बाजार में पैकेट बंद कुट्टू का आटा बिक रहा है।
उनका कहना है कि पिछले साल आटा खाने से लोगों के बीमार होने की घटनाओं
और विभागीय छापेमारी के बाद दुकानदार भी अधिक सतर्क हो गए हैं।
पैकेट बंद उत्पादों की बिक्री से उन्हें भी कुछ राहत महसूस हो रही है।
पैकेट पर लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जरूरी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया
कि खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर भारत सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में भी निर्देश दिए गए हैं।
इनके तहत कुट्टू के आटे सहित व्रत में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री खुले में बेचने के बजाय पैकेट बंद रूप में बेची जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि पैकेट पर लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जैसी जरूरी जानकारी दर्ज होनी चाहिए।
इससे उत्पाद की पहचान और उसकी वैधता से जुड़ी जानकारी मिल सकेगी।
बिना लाइसेंस बिक्री पर होगी कार्रवाई
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
और जनहानि की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
नवरात्रि के दौरान विभाग की सतर्कता का उद्देश्य मिलावट पर रोक लगाना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
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