देहरादून: राजधानी देहरादून के दिल्ली-देहरादून हाईवे पर आशारोड़ी-मोहब्बेवाला क्षेत्र लगातार सड़क हादसों
के चलते दुर्घटना संभावित इलाका बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में बार-बार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर
NHAI के स्थलीय निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट में एक अहम कारण सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक खुले मीडियन कट भी यहां हादसों की प्रमुख वजह बन रहे हैं।
NHAI के अनुसार, हाईवे के बीच बने मीडियन में मौजूद खुले कट से स्थानीय वाहन चालक
दूसरी तरफ जाने या यू-टर्न लेने के लिए अचानक सड़क पार करते हैं।
इस दौरान तेज गति से आने वाले भारी वाहनों के सामने अचानक वाहन आने से
उन्हें संभालने में परेशानी होती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
एक साल में 15 से ज्यादा हादसे
आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच सड़क सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिछले एक साल में इस क्षेत्र में 15 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के प्रवेश बिंदु आशारोड़ी पर पहले भी दुर्घटनाओं के पीछे अलग-अलग कारण सामने आते रहे हैं।
कभी सड़क की ढलान, कभी हाईवे डिजाइन, तो कभी तेज रफ्तार
और पर्याप्त साइन बोर्ड की कमी को दुर्घटनाओं से जोड़कर देखा गया।
अब NHAI की रिपोर्ट में खुले मीडियन कट को भी प्रमुख जोखिम के तौर पर चिन्हित किया गया है।
डाट काली टनल से मोहब्बेवाला तक 7.35 किमी हिस्सा संवेदनशील
डाट काली टनल से मोहब्बेवाला तक करीब 7.35 किलोमीटर का हिस्सा
लंबे समय से दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित है।
सड़क सुरक्षा की स्थिति का जायजा लेने के लिए पुलिस प्रशासन
और NHAI की संयुक्त टीम ने 31 अगस्त को इस पूरे मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के बाद दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से कई सड़क सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
64 नए साइन बोर्ड लगाए गए
NHAI की अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार डाट काली टनल से आशारोड़ी कंपोजिट चेक पोस्ट तक
64 साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से वाहन चालकों को अलग-अलग स्थानों पर
सड़क की स्थिति और संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इनमें स्पीड लिमिट, धीमी गति, दुर्घटना संभावित क्षेत्र, पुलिस चेक पोस्ट
तीखी ढलान, CCTV कैमरा, ब्लाइंड कर्व, आबादी क्षेत्र और रोड ब्रेकर से संबंधित संकेतक शामिल हैं।
इसके अलावा करीब 3.3 किलोमीटर हिस्से में मीडियन मार्कर
500 मीटर में सोलर रोड स्टड और 485 मीटर क्षेत्र में रम्बल स्ट्रिप लगाने का काम किया गया है।
रम्बल स्ट्रिप से पहले वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए मीडियन पर दो ब्लिंकर भी लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में ट्रांसवर्स बार मार्किंग, बॉक्स मार्किंग और क्रैश बैरियर पर रिफ्लेक्टर लगाने का काम भी पूरा होने की जानकारी दी गई है।
खुले मीडियन कट से कैसे बढ़ रहा हादसों का खतरा?
NHAI की रिपोर्ट के मुताबिक हाईवे पर मौजूद खुले मीडियन कट से स्थानीय वाहन अचानक दूसरी लेन में पहुंच जाते हैं।
कई बार तेज गति से आ रहे वाहनों के चालकों को सामने से आने वाले वाहन के बारे में पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
विशेषकर भारी वाहनों की गति और वजन अधिक होने के कारण अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने की स्थिति में वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
NHAI ने इसी वजह से इन कटों को दुर्घटना के प्रमुख संभावित कारणों में शामिल किया है।
मीडियन कट बंद करने की जरूरत
NHAI की ओर से संबंधित मीडियन कट को जल्द बंद करने की जरूरत बताई गई है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है
कि खुले कट को नियंत्रित करने के बाद दुर्घटनाओं की संख्या में कितना बदलाव आता है।
आशारोड़ी देहरादून का महत्वपूर्ण प्रवेश मार्ग है। यहां दिल्ली और अन्य क्षेत्रों से आने वाले भारी वाहनों के साथ स्थानीय यातायात का भी दबाव रहता है।
ऐसे में सड़क पर किए जा रहे सुरक्षा उपायों का प्रभावी होना बेहद महत्वपूर्ण है।
NHAI के प्रबंधक तकनीकी दिव्यांशु के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद मीडियन कट दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं
और इन्हें बंद किया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि कट बंद होने के बाद हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सड़क पर दुर्घटनाओं के पीछे सिर्फ एक कारण जिम्मेदार है या नहीं
यह स्पष्ट करने के लिए अन्य तकनीकी पहलुओं पर भी लगातार निगरानी जरूरी होगी।
ढलान, सड़क डिजाइन, वाहन की गति, ट्रैफिक दबाव और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ
मीडियन कट को लेकर किए जाने वाले उपायों के प्रभाव का भी आकलन करना होगा।
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