लक्सर (हरिद्वार): लक्सर में रविवार को सामान्य वर्ग एकता मंच के बैनर तले आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में यूजीसी के नए प्रावधानों को वापस लेने
और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा एवं सुधार की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
सभा में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों के साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली
और राजस्थान से भी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और समर्थक पहुंचे।
आयोजकों के मुताबिक, हरिद्वार शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर
और बिजनौर से भी लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया। सभा के दौरान वक्ताओं ने आरक्षण नीति की समीक्षा
कानूनों के कथित दुरुपयोग और समान अवसर जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।
ढोल-नगाड़ों और फूलमालाओं से हुआ अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम शुरू होने से पहले बाहर से पहुंचे सामाजिक प्रतिनिधियों
और वक्ताओं का स्थानीय ग्रामीणों तथा आयोजन समिति के सदस्यों ने स्वागत किया।
ढोल-नगाड़ों के साथ अतिथियों को कार्यक्रम स्थल तक लाया गया और उन्हें फूलमालाएं पहनाई गईं।
सभा में मौजूद लोगों ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा
और कानूनों के दुरुपयोग को रोकने की मांग को लेकर नारे लगाए।
वक्ताओं ने अपनी मांगों को संवैधानिक
और लोकतांत्रिक माध्यम से सरकार तक पहुंचाने की बात कही।
कानून से न्याय मिलना चाहिए, भय का माहौल नहीं: पूरण सिंह चौहान
शामली से पहुंचे वक्ता ठाकुर पूरण सिंह चौहान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा
कि किसी भी कानून का मूल उद्देश्य लोगों को न्याय दिलाना होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कानूनों और नए प्रावधानों के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं
जिन पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने यूजीसी के नए प्रावधानों के साथ एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया।
चौहान ने कहा कि सामान्य वर्ग के लोगों को अपने अधिकारों
और सम्मान से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और जनप्रतिनिधियों के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने लोगों से संगठित होकर अपनी बात रखने
और चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों से नीतियों एवं फैसलों को लेकर सवाल करने की अपील की।
आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग
सभा में पहुंचे वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव और उसके परिणामों की समीक्षा की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से लागू व्यवस्था के सामाजिक और शैक्षणिक प्रभावों का आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
मिश्रा ने प्रतियोगी परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था को लेकर सामान्य वर्ग के कई युवाओं में असंतोष है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सामाजिक परिस्थितियों के साथ आर्थिक स्थिति और वास्तविक वंचना जैसे पहलुओं पर भी नीतिगत चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए एक व्यवस्था या आयोग गठित किए जाने की मांग का समर्थन किया।
समान अवसर और सामाजिक समरसता पर भी हुई चर्चा
ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड के अध्यक्ष पंडित पदम प्रकाश शर्मा ने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होनी चाहिए।
उनके अनुसार समाज में भाईचारा और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए प्रत्येक वर्ग को सम्मान और अवसर मिलने की भावना मजबूत होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नीतियों पर चर्चा इस तरह होनी चाहिए कि किसी भी समुदाय या वर्ग को अपने साथ भेदभाव होने का अहसास न हो।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बलवंत सिंह चौहान ने कहा कि सामान्य वर्ग से जुड़े मुद्दों को संगठित रूप से उठाने की आवश्यकता है।
उन्होंने समर्थकों से तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर अपनी मांगें सरकार के सामने रखने की अपील की।
जनसभा को मांगेराम त्यागी, ठाकुर जयपाल सिंह चौहान, अधीर कौशिक, सुनील कुमार अग्रवाल, राजू ओबराय
उत्तम सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह चौहान समेत कई अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
जनसभा के बाद निकाला पैदल मार्च
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभा में शामिल लोगों ने पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी एकजुट होकर महाराणा प्रताप चौक, धारीवाला पहुंचे।
यहां प्रतिनिधिमंडल ने लक्सर के उपजिलाधिकारी अनिल शुक्ला को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के लिए आयोग गठित करने की मांग रखी गई।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
सुरक्षा को लेकर तैनात रहा पुलिस बल
जनसभा और उसके बाद निकाले गए पैदल मार्च को देखते हुए पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
मार्च के दौरान पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों के साथ चलते रहे और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। आयोजन को सफल बनाने में ठाकुर अर्जुन सिंह चौहान, धर्मेंद्र चौहान, अतुल चौहान
शिवकुमार चौहान, ठाकुर अक्षय चौहान, पीयूष चौहान, नाथीराम चौहान, त्रिलोक चौहान, सौरभ चौहान, सचिन चौहान
अभिषेक चौहान, पंकज प्रधान, तरुण चौहान, विशाल चौहान, शिवम चौहान, रविन्द्र शर्मा
और नितिन चौहान समेत आयोजन समिति से जुड़े सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों ने सहयोग किया।
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