देहरादून: राजधानी देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने सड़क व्यवस्था की पोल खोल दी है. मई में बनी सड़क जुलाई की बारिश भी नहीं झेल सकी और कई जगहों पर धंस गई, जिस कारण लोगों का गुस्सा भी फूटा पड़ा. यहीं कारण है कि ग्रामीणों का पीएमजीएसवाई अधिकारियों के साथ विवाद हो गया.
दरअसल, देहरादून के मालदेवता से सोंग डैम होते हुए सौंदना गांव तक जाने वाला मोटर मार्ग लगातार हो रही बारिश के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. सड़क पर कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि पांच से छह जगहों पर भूस्खलन होने से मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है. सबसे हैरानी की बात यह है कि इस सड़क का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ था और मई महीने में ही इसकी ब्लैक टॉपिंग का काम किया गया था, जो एक बारिश की नहीं झेल पाया.
12 ग्राम पंचायतों की आवाजाही लगभग ठप: स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी नई सड़क का पहली ही बरसात में इस तरह टूट जाना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है. स्थानीय निवासी व तोला काटल गांव के योगेंद्र पनवाड़ ने बताया कि यह सड़क क्षेत्र की करीब 10 से 12 ग्राम पंचायतों को राजधानी देहरादून से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है. रोजाना इसी सड़क से स्कूली बच्चे, कर्मचारी, किसान, व्यापारी और ग्रामीण शहर तक पहुंचते हैं, लेकिन अब सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और जगह-जगह आए मलबे के कारण आवाजाही लगभग ठप हो गई है. कई स्थानों पर सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी लगातार बना हुआ है.

कुछ ही महीनों में धंस गई सरकार: योगेंद्र पनवाड़ ने बताया कि सड़क का निर्माण हिमालयन कंपनी द्वारा किया गया था और इतनी जल्दी सड़क का इस हालत में पहुंच जाना लोगों को समझ नहीं आ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें क्षतिग्रस्त होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन नई बनी सड़क का कुछ ही महीनों में जगह-जगह धंस जाना गंभीर चिंता का विषय है. लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और जल्द से जल्द सड़क को सुरक्षित तरीके से बहाल करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र का संपर्क दोबारा सामान्य हो सके.
टूटी सड़क पर बढ़ा तनाव: इसी मालदेवता क्षेत्र में बारिश से क्षतिग्रस्त सड़क को लेकर एक अलग विवाद भी सामने आया. आरोप है कि सड़क खोलने में देरी और मौके पर हुए विवाद के दौरान ग्राम प्रधान सहित कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारियों और उनके वाहन चालक के साथ मारपीट की.
ग्राम प्रधान ने भी रखा अपना पक्ष: इस घटना में वाहन चालक के घायल होने की बात सामने आई है. मामले के बाद विभाग की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराया गया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर ग्राम प्रधान सेरकी श्याम पयाल का पक्ष भी सामने आया है.
उन्होंने आरोपों से अलग अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले दो दिनों से क्षेत्र में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी, जिसके चलते सेरकी-भैंसवाड़ गांव मोटर मार्ग कई जगहों से टूट गया. देहरादून से सरोना को जोड़ने वाली करीब 17 किलोमीटर लंबी यह सड़क आठ से दस स्थानों पर बाधित हो गई थी. ऐसे हालात में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.
श्याम पयाल के अनुसार बुधवार सुबह जिला आपदा प्रबंधन की ओर से उनसे क्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली गई थी, जिसके बाद उन्होंने मौके के हालात प्रशासन को बताए. उन्होंने कहा कि नीचे की ओर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अपनी सड़कों पर राहत कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन पीएमजीएसवाई के अधीन आने वाले मार्ग पर काम शुरू नहीं हुआ/ ऐसे में उन्होंने संबंधित जूनियर इंजीनियर को फोन कर एक जनप्रतिनिधि होने के नाते जल्द सड़क खोलने का आग्रह किया, लेकिन आरोप है कि अधिकारी ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि विभाग अपने हिसाब से काम करेगा, किसी के कहने पर नहीं.
स्कूली बच्चे, मरीज और प्रसव पीड़िता फंसी रही, फिर भी नहीं पहुंची मशीन: ग्राम प्रधान का कहना है कि सड़क बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोग घंटों तक रास्ते में फंसे रहे. इनमें स्कूली बच्चे, महिलाएं, नौकरीपेशा लोग, मरीज और यहां तक कि एक प्रसव पीड़िता महिला भी शामिल थी.
उनका आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिकारी समय से मौके पर नहीं पहुंचे. जब शाम के समय जूनियर इंजीनियर घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां भी कथित रूप से अधिकारियों का व्यवहार ठीक नहीं था. इससे पहले से परेशान स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया.
श्याम पयाल ने यह भी कहा कि क्षेत्र की कई सड़कें लगातार बारिश के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. उन्होंने क्षेत्र की खराब सड़कों की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि हालात बेहद गंभीर हैं और तत्काल राहत एवं मरम्मत कार्य की आवश्यकता है.
दो घटनाएं, एक सवाल-पहाड़ों में सड़कों की गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन पर उठे सवाल: मालदेवता क्षेत्र की ये दोनों घटनाएं अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन दोनों का केंद्र सड़क व्यवस्था और बरसात के दौरान सामने आई व्यवस्थागत चुनौतियां हैं. एक ओर हाल ही में बनी सड़क पहली ही बारिश में जवाब देती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर बंद मार्गों को खोलने में देरी और विभागीय समन्वय की कमी के आरोपों ने स्थानीय लोगों की नाराजगी बढ़ा दी है.
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में सड़कें केवल विकास का माध्यम नहीं बल्कि जीवनरेखा होती हैं. ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, समय पर रखरखाव और आपदा के दौरान त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित विभागों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. फिलहाल स्थानीय लोग सड़क बहाली के साथ-साथ क्षतिग्रस्त मार्गों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
