श्रीनगर : पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर गढ़वाल में स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने शिरकत की. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर छात्र-छात्राओं से गंभीर चर्चा की. अपने संबोधन में उन्होंने प्राचीन भारतीय सामरिक परंपराओं से लेकर आधुनिक युद्ध रणनीतियों तक की व्यापक व्याख्या करते हुए युवाओं को रणनीतिक सोच के लिए प्रेरित किया.
सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि, राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य बल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुदृढ़ बनाने में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. सीडीएस अनिल चौहान ने इतिहास के संदर्भ में कहा कि, मुगल काल के दौरान लगभग 800 सालों तक भारत की सामरिक सोच कमजोर पड़ी. साल 1947 में देश भौतिक रूप से स्वतंत्र हुआ, लेकिन मानसिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में समय लगा. उन्होंने मौलिक और स्वदेशी सोच पर जोर देते हुए कहा कि, केवल पश्चिमी रणनीतियों पर आधारित योजनाओं से पूर्ण सफलता संभव नहीं है. यदि हथियार, युद्ध नीति और रणनीति मौलिक हों, तो ही स्थायी और निर्णायक सफलता सुनिश्चित की जा सकती है.
कार्यक्रम के अंत में सीडीएस ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रों से सीधे संवाद कर उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए. इस मौके पर राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर, बौद्धिक और सार्थक चर्चा देखने को मिली, जिसने छात्रों में सामरिक सोच और राष्ट्रहित के प्रति नई समझ विकसित की