नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण के मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने को चुनौती देने वाली याचिका पर आरोपी और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह की ओर से दलीलें नहीं रखने पर आपत्ति जताई है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा कि ये मामला 2024 में दाखिल किया गया था और याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें नहीं रखी जा रही हैं. मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी.
दरअसल, गुरुवार को बृजभूषण शरण सिंह की ओर से पेश वकील ने दलीलें रखने के लिए समय देने की मांग की जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई. हाईकोर्ट ने 26 सितंबर को याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था. 29 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट ने बृजभूषण को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि आप ट्रायल शुरु होने के बाद पूरा केस खत्म करना चाहते हैं. हाईकोर्ट ने कहा था कि जब ट्रायल शुरू हो चुका है तब आप आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दे रहे हैं. आप परोक्ष रुप से पूरा केस खत्म करना चाहते हैं. सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से पेश वकील ने कहा था कि ये पूरा मामला छिपे हुए एजेंडा का है. शिकायतकर्ता नहीं चाहते हैं तो याचिकाकर्ता भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के पद पर रहे. उनकी दलील का दिल्ली पुलिस ने विरोध करते हुए कहा था कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.
इस मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट में 26 जुलाई 2024 से ट्रायल शुरू हो चुका है. 21 मई 2024 को बृजभूषण शरण सिंह और दूसरे सह आरोपी विनोद तोमर ने कोर्ट से कहा था कि वे ट्रायल का सामना करेंगे. दोनों ने मामले में कोर्ट द्वारा तय आरोपों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि कोई गलती नहीं किया है तो मानने का सवाल ही नहीं है. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 10 मई 2024 को कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने छह में से पांच महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों पर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. जबकि एक महिला पहलवान के आरोपों के मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया था.